बालाघाट में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर एक प्रमुख जनगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम संदीपनी विद्यालय के सांस्कृतिक सभागार में गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ, जिसमें सामाजिक, शैक्षिक, चिकित्सा, पत्रकारिता और विधि क्षेत्र से जुड़े कई गणमान्य नागरिक शामिल हुए।
मुख्य वक्ता प्रवीण गुप्त ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पिछले 100 वर्षों से व्यक्ति निर्माण और समाज जागरण का कार्य कर रहा है। उन्होंने इसे “100 वर्ष का युवा संगठन” बताते हुए कहा कि संघ ने कभी विचार थोपने के बजाय सनातन मूल्यों को आत्मसात कर समाज को दिशा देने का कार्य किया है।
अपने संबोधन में उन्होंने भारतीय संस्कृति की विविधता और एकता की परंपरा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भक्ति आंदोलन से लेकर स्वामी दयानंद सरस्वती और स्वामी विवेकानंद जैसे महापुरुषों ने समाज में सांस्कृतिक जागरण का कार्य किया है, जिसे संघ आगे बढ़ा रहा है।
प्रवीण गुप्त ने 1925 में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा संघ की स्थापना का उल्लेख करते हुए कहा कि संगठन का उद्देश्य राष्ट्रवाद और सांस्कृतिक उत्थान रहा है। उन्होंने आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की रक्षा और राम मंदिर आंदोलन जैसे महत्वपूर्ण योगदानों को भी रेखांकित किया।
उन्होंने “पंच परिवर्तन” के पांच प्रमुख बिंदुओं—कुटुंब प्रबोधन, सामाजिक समरसता, स्वदेशी, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक कर्तव्य—पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इन मूल्यों को जीवन में अपनाकर ही सर्व समावेशी और समरस समाज का निर्माण संभव है।
कार्यक्रम के अंत में प्रवीण गुप्त ने कहा कि समाज की भागीदारी से ही राष्ट्र निर्माण का कार्य आगे बढ़ सकता है। उन्होंने सभी से सामाजिक कार्यों में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।
बालाघाट में आयोजित यह जनगोष्ठी राष्ट्रवाद, संस्कृति और समाज निर्माण के विचारों को मजबूत करने वाली रही, जिसमें समाज के विभिन्न वर्गों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली।