1. हिन्दी समाचार
  2. Jabalpur
  3. बरगी डैम की नहर टूटने से 50 एकड़ फसल बर्बाद: प्रशासन की लापरवाही पर फूटा किसानों का गुस्सा

बरगी डैम की नहर टूटने से 50 एकड़ फसल बर्बाद: प्रशासन की लापरवाही पर फूटा किसानों का गुस्सा

जबलपुर में दाईं तट नहर टूटने से 12-15 गांव प्रभावित...

By: Abhinav Tiwari 
Updated:
बरगी डैम की नहर टूटने से 50 एकड़ फसल बर्बाद: प्रशासन की लापरवाही पर फूटा किसानों का गुस्सा

बरगी बांध की दाईं तट नहर (Right Bank Canal) में भारी टूट (ब्रिच) होने से आसपास के इलाकों में पानी खेतों में घुस गया। इस घटना में लगभग 50 एकड़ में खड़ी फसल पूरी तरह नष्ट हो गई, जिससे 12 से 15 गांवों के किसान प्रभावित हुए हैं। अचानक आए पानी से खेत जलमग्न हो गए और किसानों की महीनों की मेहनत बर्बाद हो गई।

पहले भी दी गई थी चेतावनी, फिर भी नहीं हुई कार्रवाई

मौके पर पहुंचे संवाददाता दिनेश चौधरी से ग्रामीणों ने बताया कि चार-पांच महीने पहले भी नहर के आसपास की मिट्टी बहने की शिकायत की गई थी, लेकिन संबंधित अधिकारियों ने समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया। किसानों का आरोप है कि इसी लापरवाही के चलते नहर का बड़ा हिस्सा ढह गया और खेतों में पानी भर गया।

सर्वे में भी मनमानी का आरोप

ग्रामीणों का कहना है कि नुकसान का सर्वे ‘मुंह देखी’ कार्रवाई बनकर रह गया है। आरोप है कि एक ही स्थान पर बैठकर सर्वे किया जा रहा है-जो किसान मौके पर पहुंच रहे हैं, उनका ही सर्वे हो रहा है, बाकी प्रभावित किसानों को नजरअंदाज किया जा रहा है।

प्रशासन के दावों पर सवाल

किसानों ने प्रशासन की तैयारियों पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सोशल मीडिया पर मरम्मत सामग्री पहुंचने और काम शुरू होने के दावे किए गए, लेकिन जमीन पर न गिट्टी दिखी, न सीमेंट और न ही पर्याप्त कर्मचारी। तीन-चार दिन बीत जाने के बाद प्रशासन हरकत में आया और काम शुरू हुआ, वह भी बहुत धीमी गति से।

दोहरा नुकसान झेलेंगे किसान

किसानों के मुताबिक, उन्हें दोहरा नुकसान झेलना पड़ेगा-

  1. खेतों में पानी घुसने से फसल नष्ट हो गई।

  2. अब नहर से समय पर पानी नहीं मिलने के कारण आने वाली फसलें भी प्रभावित होंगी।

कड़ी कार्रवाई और मुआवजे की मांग

ग्रामीणों और किसान नेताओं ने इसे प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही बताया है। उन्होंने मांग की है कि-

  • बर्बाद फसल का उचित और तत्काल मुआवजा दिया जाए।

  • नहर की मरम्मत युद्ध स्तर पर कराई जाए।

  • जिम्मेदार अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की जाए।

किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।

इन टॉपिक्स पर और पढ़ें:
Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक, यूट्यूब और ट्विटर पर फॉलो करे...