भोपालः कांग्रेस अनुसूचित जाति के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने कहा कि 1 अप्रैल 2025 को मध्य प्रदेश शासन की मंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र की विविधता को लेकर उन्होंने उच्च स्तरीय जांच समिति में शिकायत की थी। जिसमें स्पष्ट तथ्यों के साथ आरोप लगाए थे कि उनकी जो जाति है वह अनुसूचित जाति की बागरी जाती में नहीं आती है। उनकी जाति राजपूत समाज में आने वाली बागरी जाति है।

चूंकि बागरी जाति, अनुसूचित जाति में भी आती है तो जाति नाम की समानता का इन्होंने लाभ लिया और फर्जी प्रमाण पत्र बनवाकर मंत्री बन गई। विधायक बनी और मैने जब इसकी शिकायत की तब सरकार ने और उच्च स्तरीय जांच समिति ने प्रमुख सचिव, अनुसूचित जाति विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की। इसको लेकर मैने उच्च न्यायालय जबलपुर का दरवाजा खटखटाया और आज हाईकोर्ट ने सरकार को कड़ी फटकार लगाई है।
सरकार को जस्टिस विवेक अग्रवाल ने फटकार लगाते हुए कहा है कि आप 1 साल से क्या सो रहे थे आपकी पार्टी की विधायक है इसलिए आप इसे बचाने का प्रयास कर रहे थे। तो सरकार के पास इसका कोई जवाब नहीं था।
न्यायालय ने यह भी कहा है कि 2 महीने में इस मामले की जांच हो और अगर वह 2 महीने के अंदर उसकी जांच नहीं करती है तो, न्यायालय ने कहा कि जो याचिकाकर्ता है वह हमारे पास पुनः आ सकते हैं।
इस पूरे मामले में एक बात स्पष्ट है कि जो सुप्रीम कोर्ट के निर्णय है अगर कोई किसी की जाति प्रमाण पत्र की वैधता को लेकर शिकायत करता है तो उच्च स्तरीय जांच समिति को 2 महीने के अंदर पूरी जांच कर लेना चाहिए।
लेकिन मामला सरकार से जुड़ा हुआ था, सरकार की मंत्री से जुड़ा हुआ था तो, सरकार ने पूरे प्रयास किए कि जांच आगे नहीं बढ़ पाए। लेकिन मैं न्यायालय को धन्यवाद कहूंगा जिन्होंने मेरी याचिका पर सुनवाई करते हुए यह कहा कि इस मामले में जल्द से जल्द समाधान होना चाहिए।
भोपाल से संवाददाता राहुल अग्रवाल की रिपोर्ट