गोरखपुर के गोरखनाथ मंदिर परिसर में महंत दिग्विजयनाथ और महंत अवेद्यनाथ की पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित साप्ताहिक संगोष्ठी में नशे के दुष्प्रभावों पर चर्चा की गई। ‘नशा नाश का कारण है’ विषय पर हुए कार्यक्रम में संतों, शिक्षाविदों और चिकित्सकों ने युवाओं को नशे से दूर रहने तथा स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया।
वक्ताओं ने कहा कि नशीले पदार्थों का असर केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य तक सीमित नहीं रहता। इससे पारिवारिक संबंध, सामाजिक व्यवहार और युवाओं की शिक्षा भी प्रभावित हो सकती है। विद्यार्थियों को अच्छी संगति अपनाने और अपने समय का उपयोग शिक्षा एवं रचनात्मक गतिविधियों में करने की सलाह दी गई। मुख्य वक्ता प्रोफेसर विनोद सोलंकी ने युवाओं से अपने विचार, व्यवहार और मन पर नियंत्रण रखने की अपील की। उन्होंने संत साहित्य और उपनिषदों की शिक्षाओं का अध्ययन करने की बात कही। उन्होंने कहा कि यदि जीवन में किसी प्रकार का ‘व्यसन’ रखना है तो उसे ज्ञान और शिक्षा के प्रति समर्पण के रूप में अपनाया जाना चाहिए।
ओडिशा के कटक से आए महंत शिवनाथ जी महाराज ने विभिन्न नशीले पदार्थों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों पर प्रकाश डाला। वहीं दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के पूर्व रसायनशास्त्र आचार्य प्रो. शिवशरण दास ने विद्यार्थियों को जीवन के महत्व को समझने और नशे से बचने का संदेश दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को मंत्रों का उच्चारण कराया और उनके अर्थ भी समझाए। वक्ताओं के अनुसार नशे की आदत व्यक्ति को परिवार और सामाजिक जीवन से दूर करने के साथ कई अन्य समस्याओं का कारण बन सकती है।

आगरा से पहुंचे महंत ब्रह्मचारी लालदास जी महाराज ने नशे के शरीर पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों को संतुलित खान-पान और स्वस्थ दिनचर्या अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि नशे की वजह से विद्यार्थियों की पढ़ाई और स्मरणशक्ति प्रभावित हो सकती है। राजस्थान से आए महंत डॉ. योगी महेंद्रनाथ जी महाराज ने नशे की शुरुआत में संगति की भूमिका पर चर्चा की। उन्होंने युवाओं को गलत संगत से बचने और सकारात्मक वातावरण में रहने की सलाह दी।
नीमच, मध्य प्रदेश से आए योगी लालनाथ जी महाराज ने कहा कि नशे की समस्या का प्रभाव एक पीढ़ी तक सीमित नहीं रहता। इसलिए युवाओं को नशे से बचाने के लिए परिवार, शिक्षण संस्थानों और समाज को मिलकर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है। वहीं गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, अंबेडकरनगर के सीनियर रेजिडेंट डॉ. पृथ्वीनाथ सिंह ने नशे की लत को स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या के रूप में समझने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि कई मामलों में मित्रों का दबाव युवाओं को नशे की शुरुआत की ओर ले जा सकता है। लंबे समय तक नशे का सेवन सोचने-समझने और निर्णय लेने की क्षमता पर भी असर डाल सकता है।
डॉ. पृथ्वीनाथ सिंह ने बताया कि नशे की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए चिकित्सा और काउंसलिंग की मदद ली जा सकती है। उन्होंने तनाव या मानसिक परेशानी महसूस करने वाले लोगों को परिवार के सदस्यों से बातचीत करने और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ से परामर्श लेने की सलाह दी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता गोरक्षपीठ के प्रधान पुजारी योगी कमलनाथ जी ने की। संगोष्ठी में अयोध्या, कटक, नासिक, राजस्थान और देवीपाटन सहित विभिन्न क्षेत्रों से आए संत-महात्मा, शिक्षक और विद्यार्थी शामिल हुए।कार्यक्रम में वक्ताओं ने युवाओं को नशे से दूर रखने, सकारात्मक संगति बढ़ाने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने पर जोर दिया। संगोष्ठी का मुख्य संदेश रहा कि नशे की रोकथाम के लिए जागरूकता, परिवार का सहयोग, सही संगति और जरूरत पड़ने पर उपचार एवं काउंसलिंग—सभी की भूमिका महत्वपूर्ण है।