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किसान के लिए गूगल बना मार्गदर्शक: कर रहे विदेशी साग सब्जी और फूलों की खेती

By: RNI Hindi Desk 
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किसान के लिए गूगल बना मार्गदर्शक: कर रहे विदेशी साग सब्जी और फूलों की खेती

राजधानी से चंद किलोमीटर दूर बाराबंकी में एक किसान पारंपरिक खेती से हट कर गूगल और इंटरनेट के माधयम से अलग-अलग साग-सब्जी व फल उगा कर कीर्तिमान बना रहे है।

अपनी कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी को परास्त कर खेती में नए आयाम पैदा कर रहे हैं।

बाराबंकी जनपद के छोटे से गांव विशुनपुर में रहने वाले गया प्रसाद मौर्य ने अपने जीवन के तमाम समस्याओं के बाद धान-गेंहू जैसी पारंपरिक खेती छोड़ कर जैविक खेती में साग सब्जी और फूलों की खेती को अपनाया।

लगतार गूगल और इंटरनेट की सहायता से सतावर, काला गेंहू, ब्रोकली, समेत तरह-तरह के फसलों की खेती कर रहे है।

किसान गया प्रसाद मौर्य ने इस बार तमाम बीमारियों को दूर करने वाले शरीर मे खून व प्लेटलेट्स की कमी को पूरा करने वाले फल ड्रैगन फ्रूट की खेती कर रहे है।

कैक्टस प्रजाति का ये खेती लगभग 25 से 30 सालों तक रहती है और प्रति वर्ष चार बार ये फल देता है। एक पौधे से लगभग 50 फल प्राप्त होते हैं। 300 से 400 ग्राम वजनी इन फलों की सीजन में 300 से 500 रुपए प्रति किलो की कीमत मिल जाती है।

ड्रैगन फ्रूट के पौधों को सहारा देना पड़ता है। इसलिए किसान जिगर ने सीमेंट के खंभे बनवाकर खेत में लगवाए हैं। पूरे खेत में ड्रिप एरिगेशन की मदद से सिंचाई की की जाती है।

किसान गयाप्रसाद के अनुसार इस फल की ज्यादा मांग होने से अच्छी आमदनी होने की उम्मीद है।

गूगल से मिली जानकारी पर गयाप्रसाद ने ड्रैगन फ्रूट की खेती करने का मन बनाया और लगभग एक एकड़ में उद्यान विभाग की मदद से पौधे लगाए जो लगभग तैयार हो रहे है।

गया प्रसाद का कहना है कि टेलीविजन पर इस फसल की जानकारी मिली जिससे लखनऊ स्थित सीमैप द्वारा एक पौधा मिला जिसको लगा कर मैने टेस्ट किया और सफल होने पर एक एकड़ के लिए गुजरात से इसके पौधे मंगा के लगाए है।

एक पौधे में लगभग पचास फूल मौजूद है। इसके सेवन से शरीर होने वाली गंभीर बीमारियों से लड़ने की क्षमता बढ़ती है।

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