नई दिल्ली : उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व राज्यपाल कल्याण सिंह का सोमवार दोपहर को बुलंदशहर जिले के नरौरा घाट पर राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। उनके सांसद पुत्र राजवीर सिंह उर्फ राजू भैया ने उन्हें मुखाग्रि दी। उनके अंतिम संस्कार में सीएम योगी, गृहमंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत कई बड़े नेता शामिल हुए।
आपको बता दें कि लंबी बीमारी के बाद 21 अगस्त को कल्याण सिंह का निधन हो गया था। वो 89 साल के थे और पिछले करीब डेढ़ महीने से अस्पताल में भर्ती थे। इस मौके पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी, सीएम योगी और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने आहुति दी। अमित शाह ने कहा कि, ‘उनका जाना भाजपा के लिए बड़ी क्षति है। बीजेपी ने एक दिग्गज और हमेशा संघर्षरत रहने वाला नेता खोया है। दबे, कुचले, पिछड़ों ने अपने शुभचिंतक नेता गंवाया है।’ उन्होंने कहा, राम जन्मभूमि आंदोलन के लिए उन्होंने बिना सोचे-समझे सत्ता त्याग दी।

शाह ने कहा कि जिस दिन राम मंदिर का शिलान्यास हुआ था, उसी दिन मेरी बाबूजी (कल्याण सिंह) से बात हुई थी। उन्होंने कहा था कि मेरे जीवन का लक्ष्य पूरा हो गया। बाबू जी का पूरा जीवन यूपी के विकास व गरीबों के लिए समर्पित रहा। देश को बेहतर गति एवं दिशा दी। प्रदेश का विकास किया। उन्होंने अपने कार्यों की गहरी छाप छोड़ी है। बाबूजी के जाने से भाजपा में जो रिक्तता आई है, उसकी लंबे समय तक भरपाई नहीं हो सकती। बाबूजी लंबे समय से सक्रिय राजनीति में नहीं थे। लेकिन उनको उनके उम्र के साथ-साथ युवाओं का भी साथ मिला। वह हमेशा भाजपा के प्रेरणास्त्रोत रहेंगे।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अलीगढ़ में कहा कि कल्याण सिंह एक व्यक्ति नहीं, एक संस्था और आंदोलन थे। अयोध्या में भगवान राम की जन्मभूमि पर भव्य मंदिर का निर्माण उनका संकल्प था और ये संकल्प उनके बिना पूरा नहीं हो सकता था।
वैदिक विधि-विधान से 21 पंडित ने किया अंतिम संस्कार
वहीं नरौरा घाट पर पुरोहित चंद्र पाल आर्य ने बताया कि 21 पंडित ने वैदिक विधि-विधान से उनका अंतिम संस्कार संपन्न कराया। उन्होंने बताया कि 20 किलो चंदन की लकड़ी, 5 क्विंटल आम की लकड़ी, 50 किलो केसर कपूर और अन्य औषधियों की सामग्री, 60 किलो घी से अंतिम संस्कार की वैदिक विधि विधान से प्रकिया पूरी हुई।
देश की राजनीति का एक अध्याय थे कल्याण सिंह
कल्याण सिर्फ एक नेता नहीं थे, वो सिर्फ विधायक, मुख्यमंत्री और गवर्नर रहने वाले एक शख्सियत नहीं थे। कल्याण सिंह वो शिल्पकार थे, जिन्होंने ना सिर्फ बीजेपी की राजनीति गढ़ी बल्कि वो देश की राजनीति का एक अध्याय थे। जो कमंडल और मंडल आज बीजेपी की राजनीति का सबसे बड़ा दांव है, उस दांव के पहले रणनीतिकार और चेहरा तो वही थे।
बाबूजी के तौर पर सम्मानित थे
कल्याण सिंह बीजेपी के नेताओं के लिए बाबूजी के तौर पर सम्मानित थे, लेकिन राजनीति का उनका कद ऐसा था कि धुर विरोधी मुलायम सिंह यादव हों या मायावती, उत्तर प्रदेश की राजनीति में उनकी राजनीतिक हैसियत को समझा।
कल्याण सिंह ने 1992 में 1990 की यूपी की मुलायम सरकार के ठीक उलट, अयोध्या आए कारसेवकों पर अपनी सरकार में गोली नहीं चलने दी और सत्ता गंवा दी। विवादित ढांचा ढहाए जाने की 6 दिसंबर 1992 की उस घटना को लेकर, और उसमें कल्याण सिंह सरकार के स्टैंड को लेकर बहसें पहले भी हुई हैं, आगे भी होती रहेंगी।
आपको बता दें कि पूर्व सीएम कल्याण सिंह के अंतिम संस्कार में केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी, अजय भट, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य, उमा भारती समेत कई बड़े नेता मौजूद रहे। वहीं केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी, सीएम योगी और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने आहुति दी।