देश की राजधानी दिल्ली की सीमाओं पर किसान आंदोलन को दो महीने होने जा रहे है। केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीन नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसान नेताओं और सरकार के बीच नौ दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है।
इस बीच महाराष्ट्र के नागपुर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए राकेश टिकैत ने कहा कि वो सरकार से मिनिमम सपोर्ट प्राइस पर सरकार से कानूनी गारंटी चाहते हैं। आप को बता दे कि सुप्रीम कोर्ट ने 11 जनवरी को तीन कृषि कानूनों के कार्यान्वयन पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है।
शीर्ष अदालत ने इस मामले में गतिरोध को समाप्त करने के लिये चार सदस्यीय समिति का गठन किया था लेकिन किसान संगठनों ने इस समिति को सरकार समर्थक बताया है और साफ कहा है कि वे सरकार से तो बारबार चर्चा को तैयार हैं लेकिन समिति के समक्ष नहीं जाएगा। किसानों का कहना है कि समिति के सदस्य पहले ही सरकार के कृषि कानूनों के पक्ष में राय दे चुके हैं।
उन्होंने कृषि कानूनों को लागू करने पर रोक लगाने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया लेकिन कहा कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित समिति में जो सदस्य हैं, उन्होंने कृषि विधेयकों का समर्थन किया था।
टिकैत ने कहा कि हम सुप्रीम कोर्ट की गठित समिति के सामने नहीं जाना चाहते। सरकार ने भी कहा है कि सरकार और किसान इस मुद्दे पर समाधान खोज लेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि देश में विपक्षी दल कमजोर हैं और इसलिए किसानों को केंद्र के नए कानूनों के खिलाफ यह आंदोलन शुरू करना पड़ा।
अमीर किसानों की ओर से प्रदर्शन में मदद किए जाने के आरोपों को खारिज करते हुए टिकैत ने कहा कि गांवों और अनेक संगठनों के लोगों ने इसमें भाग लिया है।
उन्होंने अपनी बात रखते हुए आगे कहा कि यह दिल्ली से शुरू हुई किसानों की वैचारिक क्रांति है और विफल नहीं होगी। गांवों में किसान चाहते हैं कि हम तब तक नहीं लौटें जब तक तीनों कृषि विधेयकों को वापस नहीं लिया जाता।
भारतीय किसान यूनियन नेता राकेश टिकैत ने कहा कि किसान केंद्र के नए कृषि कानूनों के खिलाफ मई 2024 तक आंदोलन करने के लिए तैयार हैं। दिल्ली की सीमाओं पर चल रहे किसानों के आंदोलन को उन्होंने वैचारिक क्रांति करार दिया है।
टिकैत से जब पूछा गया कि किसान कब तक प्रदर्शन करेंगे, तो उन्होंने कहा कि हम मई 2024 तक प्रदर्शन करने के लिए तैयार हैं। हमारी मांग है कि तीनों कानूनों को वापस लिया जाए और सरकार MSP पर कानूनी गारंटी दे। देश में अगले लोकसभा चुनाव अप्रैल-मई 2024 के आसपास ही होने की संभावना है।
किसानों के प्रदर्शन का समर्थन करने वाले कुछ लोगों को राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) के नोटिसों पर उन्होंने कहा कि जो लोग आंदोलन का हिस्सा बनना चाहते हैं, उन्हें अदालत के मामलों, जेल और संपत्ति सील किए जाने के लिए तैयार रहना चाहिए।
कृषि कानूनों के खिलाफ किसान 26 नवंबर, 2020 से दिल्ली की सीमाओं पर और देश में कोने कोने में प्रदर्शन चालू है। दिल्ली कड़ी ठंड में भी किसान प्रदर्शन कर रहे हैं। किसानओ का कहना है कि जब तक कृषि कानून को केंद्र सरकार वापस नहीं लेगी तब तक वह अपना प्रदर्शन चालू रखगे। किसानों ने आशंका जताई है कि नए कानून एमएसपी के सुरक्षा घेरे को समाप्त करने और मंडी प्रणाली को बंद करने का रास्ता साफ करेंगे।