नई दिल्ली : सिंघु बॉर्डर पर निहंग सरदारों को लेकर एक बार फिर विवाद शुरु हो गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक निहंग (Nihang) मुर्गा लेने गया था। इसी दौरान किसी बात पर कहासुनी हुई तो मजदूर की पिटाई कर दी और उसकी टांग तोड़ दी। आपको बता दें कि 6 दिन पहले ही सिंघु बॉर्डर पर एक दलित युवक की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। उसका एक हाथ और एक पैर काटकर किसान आंदोलन (farmers Protest) के मंच के सामने बैरिकेड पर लटका दिया गया था। निहंग सिखों का आरोप था कि युवक ने गुरु ग्रंथ साहिब (Guru granth sahib) की बेअदबी की है। इसलिए उसे सजा दी गई है।
इधर, गुरुवार को किसान आंदोलन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक बार फिर सुनवाई हुई। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि सड़कों को बंद करके विरोध-प्रदर्शन नहीं किया जा सकता है। किसानों को विरोध करने का अधिकार है, लेकिन अनिश्चितकाल के लिए सड़कें बंद नहीं की जा सकती हैं। इधर, संयुक्त किसान मोर्चा का कहना है कि सड़कों को विरोध करने वाले किसानों ने नहीं, बल्कि पुलिस ने जाम किया है। सुप्रीम कोर्ट ने किसानों को सड़कों से हटाने की मांग वाली याचिका पर संयुक्त किसान मोर्चा और अन्य किसान संगठनों को चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा है। इधर, दिल्ली पुलिस गाजीपुर बॉर्डर पर पहुंची है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा
‘आप किसी भी तरह विरोध करिए, लेकिन इस तरह सड़क रोक कर नहीं। कानून पहले से तय है। हमें क्या बार बार ये ही बताना होगा। सड़कें साफ होनी चाहिए। हम बार-बार कानून तय करते नहीं रह सकते। आपको आंदोलन करने का अधिकार है लेकिन सड़क जाम नहीं कर सकते। अब कुछ समाधान निकालना होगा।’
हमने रास्ते नहीं रोके, पुलिस ने बैरिकेड लगाए
दरअसल, लंबे समय से दिल्ली बॉर्डर के पास सड़कों पर किसानों का डेरा जमा है, इससे इन सड़कों पर ट्रैफिक बुरी तरह प्रभावित है। मामले में 7 दिसंबर को सुनवाई होगी। वहीं, खबर है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद प्रदर्शनकारी किसानों ने गाजीपुर बॉर्डर से बैरिकेड हटाने शुरू कर दिए हैं। संयुक्त किसान मोर्चा के नेता राकेश टिकैत ने कहा कि हमने रास्ते नहीं रोके हैं। पुलिस ने बैरिकेड लगाए हैं। अब जिसने रास्ते रोके हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई हो।
किसानों भाइयों यह अफवाह फैलाई जा रही हैं कि गाज़ीपुर बॉर्डर खाली किया जा रहा है।
यह पूर्णतया निराधार है ,हम यह दिखा रहे है कि रास्ता किसानों ने नही दिल्ली पुलिस ने बन्द किया है।#FarmerProtest @AmarUjalaNews @Live_Hindustan @HomeDepartmentUP @AHindinews @PTI_News @BKU_MP— Bhartiya kisan Union (@OfficialBKU) October 21, 2021
नोएडा की रहने वाली मोनिका अग्रवाल ने इस मामले में मार्च में याचिका दाखिल की थी। उन्होंने किसान आंदोलन के चलते कई महीने से बाधित दिल्ली और नोएडा के बीच यातायात का मसला उठाया था। सुनवाई के दौरान कोर्ट को हरियाणा से लगी दिल्ली की कुछ और सीमाओं को भी किसान आंदोलनकारियों की तरफ से रोके जाने की जानकारी मिली। इस पर कोर्ट ने हरियाणा और यूपी को भी पक्ष बनाया लिया था।
43 संगठनों को जारी हो चुका है नोटिस
पिछले दिनों हरियाणा सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में संयुक्त किसान मोर्चा के तहत 43 किसान संगठनों को पक्षकार बनाने की अर्जी दाखिल की थी। मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए कहा था कि हाइवे और सड़कों को जाम नहीं किया जाना चाहिए, कानून पहले ही तय कर चुका है। पिछले 6 महीने से लंबित इस मामले में केंद्र, यूपी और हरियाणा सरकार ने हमेशा यही जवाब दिया कि वह आंदोलनकारियों को समझा-बुझा कर सड़क से हटाने की कोशिश कर रहे हैं। 30 सितंबर को हरियाणा सरकार की तरफ से सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया था कि आंदोलनकारियों से बात कर सड़क खाली करवाने के लिए एक कमेटी बनाई गई है। बातचीत के लिए किसान संगठनों को आमंत्रित किया गया, लेकिन कोई भी नहीं आया।