डॉ. दीप्ति अग्रवाल की मौत मामला : सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय बेंच ने सीबीआई जांच के आदेश दिए
उत्तर प्रदेश के आगरा के ताजगंज क्षेत्र के विभव नगर स्थित विभव वैली व्यू अपार्टमेंट के फ्लैट में डॉ. दीप्ति अग्रवाल की मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय बेंच ने सीबीआई जांच के आदेश दिए हैं। ससुर, सास, जेठ और जेठानी को हाईकोर्ट से मिली अग्रिम जमानत के आदेश को भी खारिज कर दिया गयाहैं। डॉ. दीप्ति अग्रवाल तीन अगस्त को अपने फ्लैट में ,फंदे में लटकी मिली थीं।
आगरा की डॉ. दीप्ति अग्रवाल की मौत के मामले में सुनवाई करते हुए शीर्ष न्यायालय ने हाईकोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया है। शीर्ष न्यायालय ने कहा, कुछ सूचनाओं को सार्वजनिक किया जाना और सुबूत के तौर पर प्रयुक्त होने वाली सामग्री या तथ्य का रहस्योद्घाटन करना मामले की सुनवाई पर असर डाल सकता है।
शीर्ष अदालत ने कहा कि मीडिया का यह व्यवहार आपराधिक न्याय के प्रशासनिक प्रक्रिया को पटरी से उतार भी सकता है। कुछ मामलों में मीडिया के आचरण पर यह टिप्पणी जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस इंदू मल्होत्रा और जस्टिस इंदिरा बनर्जी की पीठ ने की।
पीठ ने कहा, संज्ञेय अपराध की सूचना मिलने या उसके पंजीकृत होने पर जांच अधिकारी का कर्तव्य है कि वह पूरी गंभीरता से मामले की जांच करे। लेकिन उसका प्रयास उस समय कमजोर पड़ जाता है, जब महत्वपूर्ण जानकारी या तथ्य सार्वजनिक हो जाता है।
यह रहस्योद्घाटन कई बार आरोपी के खिलाफ भी जाता है, क्योंकि उसके बाद खुद को निर्दोष साबित करने की उसकी क्षमता भी प्रभावित हो जाती है। यह स्थिति किसी पीडि़त या उसके परिजनों के लिए भी ठीक नहीं होती है। ज्यादातर मामलों में पीडि़त और उसके परिजन सार्वजनिक होने वाली सूचनाओं पर अपनी सफाई देने के लिए उपलब्ध नहीं होते। वे नहीं बता पाते कि किन परिस्थितियों में अपराध हुआ। इस तरह की स्थितियां खासतौर पर सीबीआइ जांच के दौरान पैदा होती हैं। पीठ ने ये टिप्पणियां इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कीं।