प्रोटीन, उच्च फाइबर व विटामिन बी से भरपूर काला मटर रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, रक्त में शुगर व कॉलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने का काम करता है।
किसान पहले काले मटर का खूब उत्पादन करते थे। दाल के अलावा सत्तू में मिलाकर काले मटर का प्रयोग किया जाता था।
काला मटर तीन साल तक खराब नहीं होता है। इसकी बिजाई अप्रैल में होती है। एक बीघा क्षेत्र में करीब पांच किलो बीज लगता है।
हरा मटर 15 दिन के अंदर खराब हो जाता है। कोरोना महामारी के चलते वर्तमान में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
लोग बाहरी क्षेत्र से दालें नहीं मंगवाना चाहते हैं, इसलिए इस बार काले मटर की अधिक बिजाई की गई है।
किसानों ने इस बार हरे मटर की बजाय काले मटर की अधिक बिजाई की है। यह मटर कई साल तक खराब नहीं होता है।