गोरखपुर विश्वविद्यालय परिसर में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के सदस्यता अभियान के दौरान विवाद की स्थिति सामने आई है। ABVP के महानगर विभाग संयोजक प्रशांत त्रिपाठी ने कुछ लोगों पर संगठन के कार्यकर्ताओं को गंभीर धमकियां देने का आरोप लगाया है। इसी घटनाक्रम के बीच छात्र नेता सतीश प्रजापति को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने की बात सामने आई है।
प्रशांत त्रिपाठी के अनुसार, संगठन के कुछ कार्यकर्ताओं को पिछले कई दिनों से धमकियां मिल रही थीं। उन्होंने दावा किया कि कार्यकर्ताओं को गोली मारने और बम से हमला करने जैसी धमकियां दी गईं। उन्होंने कहा कि मामले की जानकारी पुलिस और प्रशासन को पहले ही दी जा चुकी थी। प्रशांत त्रिपाठी के मुताबिक सदस्यता अभियान के दौरान विवाद की स्थिति बनने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और कुछ लोगों को अपने साथ ले गई।
ABVP की ओर से कुछ लोगों पर छात्राओं के साथ कथित तौर पर अनुचित व्यवहार की मंशा का भी आरोप लगाया गया है। प्रशांत त्रिपाठी ने कहा कि इस विषय को लेकर संगठन की ओर से प्रशासन से संपर्क किया जा रहा था।हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और मामले में पुलिस की विस्तृत जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
प्रशांत त्रिपाठी ने यह भी आरोप लगाया कि ABVP कार्यकर्ताओं के खिलाफ जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए मुकदमा दर्ज कराने की धमकी दी गई। उन्होंने दावा किया कि विवाद के दौरान संगठन के सदस्यों को अलग-अलग तरह से डराने का प्रयास किया गया। ABVP की ओर से पूरे मामले को लेकर पुलिस को शिकायत दिए जाने की बात भी कही गई है।

विवाद के बीच छात्र नेता सतीश प्रजापति को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, पुलिस ने अभी तक हिरासत की वजह और आगे की कार्रवाई को लेकर विस्तृत आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं है कि हिरासत किस शिकायत या घटनाक्रम के आधार पर की गई और मामले में पुलिस की ओर से क्या कार्रवाई प्रस्तावित है।
प्रशांत त्रिपाठी ने दावा किया कि मौके पर ABVP कार्यकर्ताओं की ओर से किसी तरह की मारपीट नहीं हुई। उनका कहना है कि जब संगठन के कार्यकर्ता घटनास्थल पर पहुंचे, तब तक पुलिस संबंधित लोगों को हिरासत में लेकर जा चुकी थी।
गोरखपुर विश्वविद्यालय में इससे पहले भी छात्र गतिविधियों को लेकर पुलिस और छात्रों के बीच विवाद की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। सितंबर की शुरुआत में छात्र आंदोलन के दौरान भी विवाद की स्थिति बनी थी, जिसके बाद पुलिस और छात्रों की ओर से अलग-अलग दावे सामने आए थे। फिलहाल मौजूदा मामले में ABVP की ओर से गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जबकि पुलिस की ओर से कुछ लोगों को हिरासत में लिए जाने की बात सामने आई है। पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति पुलिस की जांच, शिकायतों और दोनों पक्षों के बयानों के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगी।