जबलपुर। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ‘कृषक कल्याण वर्ष-2026’ के तहत जबलपुर में आयोजित ‘बलराम कृषि महोत्सव’ में वर्चुअल माध्यम से भाग लिया। इस दौरान उन्होंने किसानों से संवाद करते हुए प्राकृतिक खेती, पराली प्रबंधन, सिंचाई सुविधाओं और कृषि उत्पादों को बढ़ावा देने पर जोर दिया। सरकार का लक्ष्य आधुनिक तकनीक और टिकाऊ कृषि पद्धतियों के माध्यम से किसानों की आय और आर्थिक स्थिति को मजबूत करना है।
जिले में प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए करीब 5,000 किसानों को 40 क्लस्टरों के माध्यम से जोड़ा गया है। इस पहल का उद्देश्य खेती में रासायनिक संसाधनों पर निर्भरता कम करना और पर्यावरण के अनुकूल कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना है। प्राकृतिक खेती के जरिए किसानों को टिकाऊ कृषि की ओर प्रेरित किया जा रहा है, जिससे लंबे समय में खेती की लागत कम करने में मदद मिल सकती है।
पराली जलाने की समस्या से निपटने के लिए जिले में 15 हजार एकड़ से अधिक क्षेत्र में पराली की बेलों से जैविक खाद तैयार करने को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इस पहल से फसल अवशेषों का उपयोगी प्रबंधन करने और खेतों में पराली जलाने की घटनाओं को कम करने का प्रयास किया जा रहा है। पराली से खाद बनाने की प्रक्रिया किसानों के लिए अतिरिक्त उपयोगिता पैदा करने के साथ मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने में भी मददगार हो सकती है।

जिले में बड़ादेव और छीताखुदरी सिंचाई परियोजनाओं के माध्यम से लगभग 40,000 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा का लाभ मिलने की उम्मीद है। इन परियोजनाओं से किसानों को खेती के लिए पानी की उपलब्धता बेहतर बनाने और कृषि उत्पादन को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है।
मुख्यमंत्री ने क्षेत्र की पहचान बने स्वादिष्ट मटर और सिंघाड़े का भी उल्लेख किया। उन्होंने इन दोनों उत्पादों को GI टैग मिलने को गौरव का विषय बताया। भौगोलिक संकेतक (GI) टैग किसी उत्पाद की विशिष्ट भौगोलिक पहचान और उससे जुड़ी विशेषताओं को मान्यता देता है। स्थानीय कृषि उत्पादों को पहचान मिलने से उनकी ब्रांडिंग, बाजार में पहुंच और किसानों के लिए बेहतर अवसर तैयार करने में मदद मिल सकती है।
डॉ. मोहन यादव ने किसानों को परंपरागत कृषि ज्ञान के साथ आधुनिक तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कृषि क्षेत्र में नवाचार, प्राकृतिक खेती और बेहतर सिंचाई सुविधाओं को किसानों की समृद्धि के लिए महत्वपूर्ण बताया। ‘कृषक कल्याण वर्ष-2026’ के तहत आयोजित यह महोत्सव खेती को अधिक टिकाऊ, उत्पादक और लाभकारी बनाने की दिशा में सरकार के प्रयासों को सामने लाता है।