Madhya Pradesh News: मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले में मोगरीखेड़ा डैम के सर्वे और पैमाइश को लेकर आसपास के गांवों के किसानों की चिंता बढ़ गई है। बता दें करीब 100 हेक्टेयर कृषि भूमि डूब क्षेत्र में आने की आशंका के बीच लगभग 38 किसान आज मंगलवार को कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। जिसके बाद ग्रामीणों ने कलेक्टर को आवेदन सौंपकर सर्वे की जांच कराने और जमीन का सही आकलन करने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि मोगरीखेड़ा डैम निर्माण के लिए किए जा रहे सर्वे का असर ग्राम पंचायत राजमलीवन एवं झरीमाता के राजमली, चिचबा, मोगरीखेड़ा सहित आसपास के गांवों की कृषि भूमि पर पड़ सकता है। जिसमें किसानों को आशंका है कि यदि उनकी जमीन डूब क्षेत्र में आती है, तो खेती और आजीविका दोनों प्रभावित होंगे। बताया जा रहा है कि संभावित रूप से प्रभावित किसानों में अधिकांश आदिवासी परिवार हैं। इन परिवारों के पास सीमित कृषि भूमि है और खेती ही उनकी आय का मुख्य साधन है। अब ऐसे में जमीन डूब क्षेत्र में आने की स्थिति में उनके सामने परिवार के भरण-पोषण का संकट खड़ा हो सकता है।

बता दें ग्रामीणों ने डैम की स्वीकृति और सर्वे के स्थान को लेकर भी सवाल उठाए हैं। जिसमें उनका कहना है कि समाचार पत्रों में तालाब मोगरखेड़ी में स्वीकृत होने की जानकारी प्रकाशित हुई थी, जबकि संबंधित विभाग चिचबा नाले पर डैम स्वीकृत होने की बात कहकर झरीमाता क्षेत्र में सर्वे कर रहा है। जिसके बाद किसानों ने मांग की है कि सर्वे की वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए और पैमाइश नियमानुसार की जाए, ताकि किसी भी किसान की जमीन का गलत आकलन न हो।
दरअसल, ग्रामीणों का कहना है कि वे डैम निर्माण के विरोधी नहीं हैं, लेकिन सर्वे निष्पक्ष और सही तरीके से होना चाहिए। जिसमें उन्होंने क्षेत्र के पांचवीं अनुसूची में आने का हवाला देते हुए PESA कानून के तहत ग्राम सभा की सहमति से जुड़े प्रावधानों का मुद्दा भी उठाया है। जिसके बाद किसानों ने कलेक्टर से पूरे मामले की जांच कराने, प्रभावित भूमि की सही पहचान करने और नियमानुसार उचित निर्णय लेने की मांग की है।
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