गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक एमएलसी चुनाव की मतगणना के बीच अब चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं। एक तरफ देवरिया बनकटा का मत पेटिका बॉक्स बिना सील मिलने की बात सामने आई है, तो दूसरी तरफ मऊ में मतपेटी से 52 अतिरिक्त तो वही मऊ के ही बूथ संख्या 116 पर 8 वोट कम मिलने तो बांसी में भी बूथ 36 में 2 मतपत्र कम मिलने का दावा किया जा रहा है। अंबेडकरनगर में भी 16 वोट कम पाए जाने की जानकारी सामने आई है। तीन अलग-अलग जिलों से सामने आई इन घटनाओं ने मतगणना की पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, इन मामलों में आधिकारिक जांच और निर्वाचन अधिकारियों की पुष्टि का इंतजार है।
गोरखपुर विश्वविद्यालय के वाणिज्य संकाय में मंगलवार सुबह 8 बजे से शिक्षक एमएलसी चुनाव की मतगणना शुरू हुई। इस चुनाव में 17 जिलों के 200 मतदान केंद्रों से आई मतपेटियों के जरिए मतों की गिनती की जा रही है। मतगणना के लिए 14 टेबल लगाई गई हैं और चुनाव मैदान में कुल 16 प्रत्याशी हैं। इसी बीच देवरिया के बनकटा का बिना सील का मतपेटी बॉक्स मिलने की बात सामने आने से चुनावी प्रक्रिया को लेकर चर्चा तेज हो गई है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि संबंधित मतपेटी किस जिले और किस मतदान केंद्र की है? सील नहीं होने की स्थिति में मतपेटी को किस प्रक्रिया के तहत खोला गया और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए गए? हालांकि, इस मामले में संबंधित मतपेटी की पहचान और निर्वाचन अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष सामने आना जरूरी है।

अब बात मऊ की, जहां मतपेटी में निर्धारित संख्या से 52 अतिरिक्त मतपत्र मिलने की जानकारी सामने आई है। तो वही मऊ के ही बूथ संख्या 116 पर 8 वोट कम मिलने की जानकारी सामने आई है, अगर मतपत्रों की संख्या और मतदान के आधिकारिक रिकॉर्ड में अंतर पाया गया है, तो उसका मिलान पीठासीन अधिकारी के रिकॉर्ड और फॉर्म-16 से किया जाना जरूरी है। सवाल यह है कि अतिरिक्त मतपत्र कितने हैं? क्या वे वास्तविक मतदान का हिस्सा हैं या रिकॉर्ड में किसी तरह की विसंगति है? इसका जवाब मतपत्रों की संख्या, मतदान अभिलेखों और निर्वाचन अधिकारियों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
तीसरा मामला अंबेडकरनगर और बांसी से जुड़ा है, जहां सूत्रों के हवाले से अंबेडकर नगर में 16 वोट कम तो बांसी में बूथ 36 में 2 वोट कम पाए जाने की जानकारी सामने आई है। यहां भी सबसे अहम सवाल यही है कि मतपेटी में मिले मतपत्रों की संख्या और आधिकारिक मतदान रिकॉर्ड के बीच अंतर क्यों आया? क्या यह अंतर मतपत्रों की गिनती या रिकॉर्ड के मिलान से जुड़ा है, या इसके पीछे कोई दूसरी वजह है? फिलहाल इसका निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। निर्वाचन अधिकारियों को रिकॉर्ड का मिलान कर स्थिति स्पष्ट करनी होगी। गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक एमएलसी चुनाव में 23 अक्टूबर को मतदान हुआ था। इसके बाद 27 अक्टूबर को गोरखपुर विश्वविद्यालय में मतगणना शुरू हुई। अब तीन जिलों से सामने आई इन कथित विसंगतियों के बीच सबकी निगाहें निर्वाचन अधिकारियों के स्पष्टीकरण पर टिकी हैं। सवाल सिर्फ मतपेटियों और मतपत्रों की संख्या का नहीं, बल्कि पूरी चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाताओं के भरोसे का भी है। अब देखना होगा कि इन मामलों में जांच के बाद क्या तथ्य सामने आते हैं और निर्वाचन प्रशासन क्या कार्रवाई करता है।