नवादा। जिले में जमीन के निबंधन और न्यूनतम मूल्य निर्धारण की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने के लिए जिला मूल्यांकन समिति की बैठक आयोजित की गई। 27 अक्टूबर 2026 को जिला पदाधिकारी रवि प्रकाश की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में ग्रामीण, पेरिफेरल और शहरी क्षेत्रों में भूमि के वर्गीकरण, न्यूनतम मूल्य की मार्गदर्शक पंजी (MVR) की दरों में समायोजन और शहरी क्षेत्र में शामिल किए गए मौजों के मूल्य निर्धारण पर चर्चा हुई।
मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग के निर्देशों के अनुसार नवादा जिले में मौजूदा MVR दरों में ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 1.6 गुना और शहरी एवं पेरिफेरल क्षेत्रों के लिए 2 गुना वृद्धि की गई है। इस व्यवस्था का उद्देश्य भूमि के निबंधन के समय उसकी निर्धारित श्रेणी के अनुसार मूल्यांकन सुनिश्चित करना है।
बैठक में भूमि की प्रकृति और स्थान के आधार पर वर्गीकरण पर विचार किया गया। ग्रामीण और पेरिफेरल क्षेत्रों में व्यावसायिक, औद्योगिक, आवासीय, सिंचित, असिंचित और अनुपजाऊ भूमि के साथ प्रमुख सड़कों के किनारे स्थित जमीन की श्रेणियां शामिल हैं। वहीं, शहरी और महानगरीय क्षेत्रों में प्रधान सड़क, मुख्य सड़क, शाखा सड़क और गलियों के आसपास की व्यावसायिक एवं आवासीय भूमि के अलावा औद्योगिक तथा कृषि और गैर-आवासीय भूमि की श्रेणियां निर्धारित की गई हैं।
समिति की पिछली बैठक के निर्देशों के अनुसार नवादा सदर, हिसुआ और वारिसलीगंज नगर परिषदों तथा रजौली नगर पंचायत से शहरी सड़कों की सूची मांगी गई थी। इसके साथ ही नवादा, हिसुआ, वारिसलीगंज, रजौली, सिरदला और नारदीगंज के अंचलाधिकारियों से पेरिफेरल मौजों की पहचान कर सूची उपलब्ध कराने को कहा गया था। बैठक में संबंधित अधिकारियों ने अपनी सूचियां प्रस्तुत कीं। विचार-विमर्श के बाद समिति ने इन्हें सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया। अब इन सूचियों के आधार पर भूमि की श्रेणियों और दरों के समायोजन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
राजस्व नुकसान रोकने के लिए समिति ने निर्णय लिया कि ग्रामीण क्षेत्रों में 10 डिसमिल तक की जमीन को यदि आवासीय श्रेणी से नीचे की श्रेणी में दिखाकर निबंधन के लिए प्रस्तुत किया जाता है, तो निबंधन से पहले संबंधित भूमि की स्थल जांच कराई जाएगी। इसका उद्देश्य जमीन की वास्तविक प्रकृति के अनुरूप मूल्यांकन सुनिश्चित करना है, ताकि गलत श्रेणी के आधार पर निबंधन होने से संभावित राजस्व क्षति को रोका जा सके।
समिति ने पेरिफेरल क्षेत्रों में 10 डिसमिल तक अंतरित होने वाली भूमि का निबंधन सिंचित श्रेणी से उच्चतर श्रेणी में करने का निर्णय लिया। इसके अलावा यदि किसी भूखंड की सीमा से एक से अधिक सड़कें लगती हैं, तो उसका मूल्यांकन उन सड़कों में से उच्चतर श्रेणी वाली सड़क के आधार पर किया जाएगा।

बैठक में बताया गया कि जिले के दोनों निबंधन कार्यालयों में पिछले पुनरीक्षण के बाद से भूमि का न्यूनतम निबंधन वर्ग दो फसला रहा है। इस स्थिति को देखते हुए नए भूमि वर्गीकरण की असिंचित श्रेणी में जमीन का निबंधन नहीं करने का निर्णय लिया गया।
समिति ने ग्रामीण और पेरिफेरल क्षेत्रों से शहरी क्षेत्र में शामिल किए गए मौजों में बड़े भूखंडों के निबंधन के लिए भी श्रेणी निर्धारित की है।
नवादा शहरी क्षेत्र: प्रति खेसरा 20 डिसमिल से अधिक भूमि के अंतरण पर कृषि/गैर-आवासीय श्रेणी में निबंधन किया जाएगा।
वारिसलीगंज, हिसुआ और रजौली शहरी क्षेत्र: प्रति खेसरा 12 डिसमिल से अधिक भूमि के अंतरण पर कृषि/गैर-आवासीय श्रेणी में निबंधन किया जाएगा।
इन प्रावधानों का उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में शामिल भूमि के मूल्यांकन में एकरूपता लाना है।
बैठक में अपर समाहर्ता, नवादा, भूमि सुधार उपसमाहर्ता, नवादा सदर एवं नवादा सदर-02, जिला निबंधन पदाधिकारी और अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे। समिति ने भूमि वर्गीकरण और MVR दरों के समायोजन से जुड़े निर्णयों के आधार पर आगे की प्रक्रिया पूरी करने पर सहमति जताई।