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केंद्र सरकार ने जारी किया OTT प्लेटफॉर्म के लिए गाइडलाइन, ये हैं गाइडलाइन

By: Amit ranjan 
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केंद्र सरकार ने जारी किया OTT प्लेटफॉर्म के लिए गाइडलाइन, ये हैं गाइडलाइन

नई दिल्ली : सोशल मीडिया के जरिये देश में बढ़ते बवाल और हिंसा को रोकने को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है, जिसे लेकर उन्होंने कई गाइडलाइन दिये है। अगर आप इस मामले में सरकार के नियमों को फॉलो नहीं करते है, तो सरकार आपके विरूद्ध उचित कार्रवाई कर सकती है। प्रेस को संबोधित कर डिजिटल मीडिया की गाइडलाइन पर केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि सोशल मीडिया को 2 श्रेणियों में बांटा गया है, एक इंटरमीडरी और दूसरा सिग्निफिकेंट सोशल मीडिया इंटरमीडरी। सिग्निफिकेंट सोशल मीडिया इंटरमीडरी पर अतिरिक्त कर्तव्य है, हम जल्दी इसके लिए यूजर संख्या का नोटिफिकेशन जारी करेंगे।

रविशंकर प्रसाद ने कहा कि एक शिकायत निवारण तंत्र रखना होगा और शिकायतों का निपटारा करने वाले ऑफिसर का नाम भी रखना होगा। ये अधिकारी 24 घंटे में शिकायत का पंजीकरण करेगा और 15 दिनों में उसका निपटारा करेगा। उन्होंने कहा कि यूजर्स की गरिमा को लेकर अगर कोई शिकायत की जाती है, खासकर महिलाओं की गरिमा को लेकर तो आपको शिकायत करने के 24 घंटे के अंदर उस कंटेट को हटाना होगा।

केंद्रीय मंत्री प्रसाद ने कहा कि कोर्ट के आदेश और सरकार द्वारा पूछा जाने पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को शरारती कंटेट का ओरिजनेटर बताना होगा। उन्होंने कहा कि सिग्निफिकेंट सोशल मीडिया के कानून को हम तीन महीने में लागू करेंगे। उन्होंने कहा कि OTT प्लेटफॉर्म के लिए त्रि-स्तरीय तंत्र होगा। OTT प्लेटफॉर्म और डिजिटल मीडिया को अपने बारे में जानकारी देनी होगी, एक शिकायत निवारण तंत्र होना चाहिए।

ये हैं ओटीटी प्लेटफॉर्म के लिए गाइडलाइन

  1. केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर के मुताबिक, ‘अब ओटीटी और वेबसाइट को अपना डिसक्लोसर देना होगा, रजिस्ट्रेशन जरूरी नहीं कर रहे, लेकिन उनकी जानकारी मांग रहे हैं, शिकायत दूर करने एक जैसा मैकेनिज्म होना चाहिए।’
  2. केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर के मुताबिक, ‘ओटीटी पर सेल्फ रेगुलेशन होगा, सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के रिटायर्ज जज या विशिष्ट व्यक्ति की अध्यक्षता में शिकायत सुनवाई के लिए बॉडी बने. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की तरह ही डिजिटल प्लेटफॉर्म को भी गलती पर माफी प्रसारित करनी होगी।’
  3. केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर के मुताबिक, ‘सेंसर बोर्ड का ऐथिक्स कोड कॉमन रहेगा, डिजिटल मीडिया पोर्टल को अफवाह या झूठ फैलाने का अधिकार नहीं है, मीडिया की आजादी की जवाबदेही होनी चाहिए, उस आजादी के दायरे में यह नियम बनाए गए हैं।’
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