मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक जिले बुरहानपुर में 400 साल पुरानी लोक आस्था और परंपरा का अनूठा नजारा देखने को मिला है। शहर से करीब 7 किलोमीटर दूर ग्राम उखड़गांव में उतावली नदी के पार स्थित प्राचीन अडबाल नाग मंदिर में ऋषि पंचमी के अवसर पर अडबाल पंचमी का भव्य पर्व मनाया गया। इस दौरान नाग देवता के दर्शन और पूजन के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा, जिसमें बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
स्थानीय परंपरा के अनुसार, इस विशेष आयोजन की शुरुआत चतुर्थी की रात से ही हो जाती है। अंधेरा रहते ही हजारों श्रद्धालु अपने घरों से निकलकर कठिन और संकरे जंगल के रास्ते को तय करते हुए मंदिर तक पहुंचते हैं। पुजारी अनिल चौधरी के अनुसार, लोग बांस की विशेष टोकरियों में मैदे और शुद्ध घी से बनी पूरियां, दूध, पानी और नारियल लेकर नाग देवता के दरबार में पहुंचते हैं और अपनी मन्नतें मांगते हैं।

मंदिर परिसर में स्थापित चिकनी मिट्टी से बनी दो विशाल बांबियों की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता है कि नाग देवता इन बांबियों में निवास करते हैं और पंचमी के दिन भक्तों को दर्शन देते हैं। भारत भूषण देवकर और गणेश सेवाधारी ने बताया कि मन्नत पूरी होने के बाद यहां नाग देवता का जोड़ा और चांदी का छत्र चढ़ाने की पुरानी परंपरा है। पुजारियों और नागमंत्रियों द्वारा कड़े नियमों के तहत पूरी धार्मिक विधि से यह अनुष्ठान संपन्न कराया जाता है।
इस बार गहरी आस्था के साथ-साथ प्रशासन और श्रद्धालुओं के सामने सुरक्षा की एक बड़ी चुनौती भी रही। पहाड़ी क्षेत्र से बहने वाली उतावली नदी में बारिश के दिनों में अचानक जलस्तर बढ़ने का खतरा रहता है। इसी जोखिम को ध्यान में रखते हुए, श्रद्धालुओं को नदी के सीधे और जोखिम भरे मार्ग के बजाय सुरक्षित जंगल के रास्ते से मंदिर तक पहुंचाने के पुख्ता इंतजाम किए गए। स्थानीय श्रद्धालु मोहन रायलीवाला ने बताया कि अडबाल पंचमी सिर्फ एक धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि बुरहानपुर की सदियों पुरानी सांस्कृतिक विरासत और अटूट विश्वास का जीवंत प्रतीक है। तमाम कठिनाइयों और नदी के जलस्तर की चिंताओं को दरकिनार कर हजारों भक्त हर साल इसी निष्ठा के साथ मंदिर पहुंचते हैं।