मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले में भारतीय किसान संघ के बैनर तले किसानों ने अपनी 37 सूत्रीय मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट पर जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान किसानों ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम डिप्टी कलेक्टर शक्ति सिंह चौहान को ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शन के माध्यम से किसानों ने पीएम फसल बीमा योजना में पारदर्शिता लाने, मंडियों में ग्रेडिंग मशीनें लगाने, समर्थन मूल्य (MSP) पर फसलों की खरीदी करने और खाद वितरण के लिए लागू ई-टोकन व्यवस्था को तुरंत बंद करने की पुरजोर मांग उठाई है।
मंगलवार दोपहर को बड़ी संख्या में किसान कलेक्ट्रेट पहुंचे। संगठन ने स्पष्ट किया कि भारतीय किसान संघ एक गैर-राजनीतिक राष्ट्रवादी संगठन है, और इसी के तहत प्रदेश की 115 तहसीलों में एक साथ जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा जा रहा है। ज्ञापन के मुख्य बिंदुओं में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में पारदर्शिता बरतना शामिल है। संघ ने मांग की है कि जिले की शॉर्टफॉल रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए, जिसमें वास्तविक उपज और नुकसान का पूरा ब्योरा हो। सैटेलाइट और रिमोट सेंसिंग पद्धति के बजाय पुराने तरीके से फसल कटाई प्रयोग के आधार पर बीमा आंकलन हो, तथा केला और मिर्च जैसी फसलों को भी बीमा दायरे में लाया जाए। इसके अलावा, अतिवृष्टि और बीमारियों से खराब हुई फसलों का सर्वे करवाकर धारा 6(4) के तहत तुरंत राहत राशि देने की मांग की गई है।

कृषि उपज मंडियों में सुधार की मांग करते हुए किसानों ने कहा कि मंडियों में आधुनिक मानक परीक्षण, डैमेज टेस्टिंग और ग्रेडिंग मशीनें अनिवार्य रूप से लगाई जाएं। ट्रैक्टर-ट्रॉली की तौल के लिए 10 टन के बड़े कांटे होने चाहिए और सुरक्षा के लिहाज से सभी सीसीटीवी कैमरे 24 घंटे चालू रहने चाहिए। साथ ही, सोयाबीन का पंजीयन शुरू करने, धान, मक्का, ज्वार और बाजरा समेत सभी खरीफ फसलों की एमएसपी पर खरीदी सुनिश्चित करने की मांग उठाई गई।
किसानों ने पिछले दो महीनों से रासायनिक खाद की किल्लत और सरकार द्वारा लागू ई-टोकन व्यवस्था पर गहरी नाराजगी जताई। किसानों का कहना है कि इस जटिल व्यवस्था के कारण वे मानसिक रूप से प्रताड़ित हो रहे हैं, क्योंकि जरूरत के वक्त टोकन में सही खाद नहीं मिल पाती। मुख्यमंत्री द्वारा इसे बंद करने की घोषणा के बावजूद यह व्यवस्था जारी है, जिसे तुरंत समाप्त किया जाना चाहिए। इसके अलावा, किसान नेता हरिकेश पाटीदार ने केंद्र सरकार की आयात-निर्यात नीति को किसानों के लिए घातक बताया। फसल कटाई के समय आयात होने से बाजार में भाव गिर जाते हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान होता है। हाल ही में असमय बारिश से कपास की फसल को हुए 15 से 20 प्रतिशत नुकसान के मुआवजे, जंगली पशुओं से सुरक्षा के लिए तार फेंसिंग पर अनुदान, देसी गाय के दूध पर 10 रुपये प्रति लीटर प्रोत्साहन राशि और कृषि न्यायालय की स्थापना की भी मांग की गई है।