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बड़वानी: अंजड़ में खेतों में भरा दो फीट पानी, 100 एकड़ से अधिक कपास की फसल बर्बाद होने की कगार पर

बड़वानी जिले के अंजड़ क्षेत्र में भारी बारिश के कारण खेतों में दो फीट तक पानी भर जाने से 100 एकड़ से अधिक कपास की फसल बर्बाद होने की कगार पर है। किसानों का आरोप है कि 40 फीट का प्राकृतिक निकासी नाला सिकुड़कर 3 फीट का रह जाने के कारण यह समस्या उत्पन्न हुई है। किसानों ने प्रशासन से सर्वे, मुआवजे और जल निकासी का रास्ता स्थायी रूप से खोलने की मांग की है।

By: Nivedita 
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बड़वानी: अंजड़ में खेतों में भरा दो फीट पानी, 100 एकड़ से अधिक कपास की फसल बर्बाद होने की कगार पर

मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले के अंजड़ क्षेत्र में लंबे इंतजार के बाद हुई भारी बारिश किसानों के लिए वरदान के बजाय आफत बन गई है। लगातार दो दिनों की बारिश से खेतों में डेढ़ से दो फीट तक पानी भर गया है, जिससे 100 एकड़ से अधिक रकबे में लहलहाती कपास की फसल पूरी तरह बर्बाद होने की कगार पर पहुंच गई है। अन्नदाताओं ने प्रशासन से तत्काल सर्वे कराकर उचित मुआवजा देने और जल निकासी के रास्ते को दुरुस्त करने की गुहार लगाई है।

चार महीने की कड़ी मेहनत पर फिरा पानी, खेतों में बदला नजारा

अंजड़ तहसील के कई इलाके इस समय जलभराव के चलते तालाब में तब्दील नजर आ रहे हैं, जहां कपास की फसलें पानी में डूबी हुई हैं। किसान कमल सिंह तोमर ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि इस सीजन में शुरुआत में कम बारिश के चलते सूखे जैसे हालात बन गए थे, लेकिन पिछले दो दिनों की तेज बारिश ने सब कुछ तबाह कर दिया। उनके और आसपास के अन्य किसानों की 100 एकड़ से ज्यादा फसल पानी में डूब चुकी है। किसानों का कहना है कि यदि अगले दो-तीन दिनों तक खेतों से पानी बाहर नहीं निकला और तेज धूप खिली, तो पानी में डूबा कपास सड़ जाएगा और पूरी फसल नष्ट हो जाएगी। ग्राम मोहीपुरा के एक अन्य किसान अंशुल पाटीदार ने बताया कि उन्होंने 7.5 एकड़ सहित इस पूरे बेल्ट में लगभग 40 एकड़ क्षेत्र में कपास की बुवाई की थी। पिछले चार महीनों से दिन-रात मेहनत करके फसल को सींचा था, लेकिन हर बार बारिश के दौरान खेतों में पानी भर जाने से उनकी सारी मेहनत पर पानी फिर जाता है। जलभराव कई दिनों तक बना रहता है, जिससे खेती करना बेहद कठिन हो गया है।

40 फीट चौड़ा प्राकृतिक नाला सिमटकर हुआ मात्र 3 फीट

किसानों के मुताबिक इस तबाही की मुख्य वजह जल निकासी के रास्तों का बंद होना है। करीब 2 से 2.5 किलोमीटर दूर स्थित जरा जैसी पहाड़ी का बरसाती पानी इन्हीं खेतों के बीच से होकर गुजरता है। पहले यहां पानी की निकासी के लिए 40 फीट चौड़ा प्राकृतिक मार्ग हुआ करता था। लेकिन समय के साथ खेतों में अवैध पाले बनाने और पास ही स्थित एक फैक्ट्री द्वारा रास्ता रोके जाने के कारण यह निकासी मार्ग सिकुड़कर मात्र 3 फीट का रह गया है। पानी निकलने की उचित जगह न होने के कारण बारिश का सारा पानी सीधे सैकड़ों किसानों के खेतों में भर जाता है। किसानों का आरोप है कि यह हर साल की समस्या है और हर बार प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपने के बावजूद कोई ठोस व स्थायी समाधान नहीं निकाला जाता है।

 

किसानों की प्रमुख मांगें

आर्थिक संकट से जूझ रहे किसानों ने जिला प्रशासन के सामने कुछ स्पष्ट मांगें रखी हैं:

 

  • राजस्व विभाग के अधिकारी (तहसीलदार और पटवारी) तुरंत मौके पर पहुंचकर फसल नुकसान का सर्वे करें।
  • प्रभावित किसानों को जल्द से जल्द उचित राहत राशि (मुआवजा) प्रदान की जाए।
  • पहाड़ी और बरसाती पानी की सुचारू निकासी के लिए पारंपरिक 40 फीट चौड़े मार्ग को अतिक्रमण मुक्त कराकर स्थायी रूप से खुलवाया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की तबाही से बचा जा सके।

 

 

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