बुरहानपुर। जिले में किसानों का पारंपरिक पर्व पोला गुरुवार को उत्साह और धार्मिक श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर किसानों ने खेती-किसानी में सहयोगी बैलों को नहलाकर सजाया और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। पूजा के बाद बैलों को मिष्ठान और विभिन्न पकवान खिलाकर उनका सम्मान किया गया।
पोला पर्व को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में सुबह से ही उत्साह का माहौल रहा। किसानों ने अपने बैलों को स्नान कराने के बाद उनके सींगों पर रंग लगाया और गले में घंटियां व आकर्षक सजावटी सामग्री पहनाई। सजे हुए बैलों के साथ किसान धार्मिक परंपराओं को निभाते नजर आए।
किसानों ने अपने बैलों को देवी-देवताओं के मंदिरों में ले जाकर पूजा-अर्चना की। इस दौरान मंदिरों में श्रीफल चढ़ाकर परिवार की सुख-समृद्धि और अच्छी फसल के लिए प्रार्थना की गई। कई स्थानों पर बैलों को विशेष पकवान और मिष्ठान खिलाया गया।

ग्रामीण मान्यताओं के अनुसार पोला पर्व से पहले खानमन्नी की परंपरा निभाई जाती है। इसमें बैलों को भोजन के लिए आमंत्रित करने की धार्मिक मान्यता है। इसके बाद पोला के दिन उन्हें सम्मानपूर्वक भोजन कराया जाता है।
किसान रतनसिंह राठौड़, सुभाष चौहान, कन्हैया चौहान और नवल राठौड़ ने बताया कि पोला पर्व किसानों के लिए खास महत्व रखता है। खेती में बैलों के योगदान को देखते हुए उन्हें परिवार के सदस्य की तरह सम्मान दिया जाता है। उनके अनुसार यह पर्व किसानों और पशुओं के बीच वर्षों पुराने आत्मीय संबंध को भी दर्शाता है। पोला पर्व के आयोजन ने बुरहानपुर में ग्रामीण परंपरा, कृषि संस्कृति और पशुओं के प्रति सम्मान की भावना को जीवंत कर दिया। पूरे दिन ग्रामीण क्षेत्रों में पर्व का उत्साह देखने को मिला।