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तालिबान प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद का बड़ा बयान, पाकिस्तान को बताया अपना दूसरा घर

अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद तालिबान ने कहा था कि वो किसी भी कीमत पर अफगानिस्तान को आतंकवाद की जमीन नहीं बनने देगा। चाहे इसे लेकर उन्हें कोई भी कदम उठाना पड़े। इसी बीच अब तालिबान ने पाकिस्तान को अपना पड़ोसी घर बताया है।

By: Amit ranjan 
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तालिबान प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद का बड़ा बयान, पाकिस्तान को बताया अपना दूसरा घर

नई दिल्ली : अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद तालिबान ने कहा था कि वो किसी भी कीमत पर अफगानिस्तान को आतंकवाद की जमीन नहीं बनने देगा। चाहे इसे लेकर उन्हें कोई भी कदम उठाना पड़े। इसी बीच अब तालिबान ने पाकिस्तान को अपना पड़ोसी घर बताया है। आपको बता दें कि ये वहीं पाकिस्तान है जो आतंक का पनाहगार है। वहीं ये तालिबान भी वहीं है जो सामने आया तो है नये बातों को लेकर, लेकिन पिछले कुछ समयों में उसकी कथनी और करनी में अंतर नजर आया है।

पाकिस्तानी न्यूज चैनल एआरवाई न्यूज को दिए इंटरव्यू में तालिबान के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने कहा कि, पाकिस्तान के साथ अफगानिस्तान की सीमाएं लगती हैं। जब धर्म की बात आती है तो हम पारंपरिक रूप से एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। दोनों देशों के लोग एक-दूसरे में आसानी से घुले-मिले हुए हैं, इसलिए हम पाकिस्तान के साथ अपने रिश्ते को और मजबूत करना चाहते हैं।

तालिबान प्रवक्ता मुजाहिद ने कहा कि हम सभी देशों के साथ अच्छे संबंध चाहते हैं। इसमें भारत भी शामिल है, जो इस इलाके का एक अहम हिस्सा है। हमारी इच्छा है कि भारत अफगान जनता की राय के मुताबिक अपनी नीतियां तैयार करें। हम अपनी सरजमीं को किसी मुल्क के खिलाफ इस्तेमाल नहीं करने देंगे। भारत और पाकिस्तान को चाहिए वे अपने द्विपक्षीय मामले सुलझाएं।’ तालिबान प्रवक्ता ने कहा कि कश्मीर को लेकर भारत को सकारात्मक रुख अपनाने की जरूरत है।

इसके साथ ही उन्होंने ओसामा बिन लादेन का भी बचाव किया। जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि ओसामा बिन लादेन 9/11 के हमलों में शामिल था। उसने आगे कहा कि 20 साल के युद्ध के बाद भी कोई सबूत मौजूद नहीं है।  तालिबान की वापसी के बाद आतंकी संगठन अलकायदा के फिर उभरने का खतरा मंडराने लगा है।

वहीं बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, अलकायदा (एक्यूआईएस) ने बयान जारी कर तालिबान को बधाई दी है। अलकायदा ने अपने बयान में अमेरिका को आक्रमणकारी और अफगान सरकार को उनका सहयोगी बताया है। जानकारों का कहना है, घरेलू उग्रवाद के साथ-साथ रूस और चीन के साइबर हमलों से जूझ रहे अमेरिका के लिए यह बड़ी परेशानियों का सबब बन सकता है।

अफगानिस्तान के नागरिकों ने दिया बलिदान

तालिबान ने कहा है कि दुश्मनों के खिलाफ इस लड़ाई में अफगान लोगों के बलिदान को भूला नहीं जा सकता है। इसके अलावा अलकायदा ने तालिबान की जीत को अमेरिका की हार बताया है। अपने बयान में उसने कहा है कि यह तालिबान के हाथों सोवियत और ब्रिटेन को मिली हार से भी बड़ी सफलता है।

कई गुटों की शरणगाह

जानकारों का कहना है कि अफगानिस्तान अब अनेक चरमपंथी गुटों की शरणगाह बन सकता है। यही वजह है कि राष्ट्रपति जो बाइडन ओवर द होराइजन क्षमता की बात कहते रहे हैं। उनके सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन ने भी बताया था, खुफिया समुदाय का मानना है कि अलकायदा के पास अमेरिका पर पहले जैसा हमला करने की क्षमता नहीं है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि अफगानिस्तान में अमेरिकी की कमजोर खुफिया क्षमता को चेतावनी की तरह लेना चाहिए।

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