उत्तर प्रदेश के नोएडा में इलाज न मिलने की वजह से शनिवार को 30 साल की गर्भवती महिला की मौत हो गई थी। अब इस मामले में जांच समिति ने सेक्टर 24 में ईएसआईसी अस्पताल को प्रथम दृष्टया दोषी माना है।
हमने आपको बताया था कि मृतका का पति उसे सबसे पहले सेक्टर 24 में ईएसआईसी अस्पताल लेकर गया था लेकिन ये जानते हुए भी ये अम्बेडकर अस्पताल सेक्टर 30 में आईसीयू और एनआईसीयू की सुविधा नहीं है, उसे वहां रैफर कर दिया।

जांच में पाया गया है कि ईएसआईसी अस्पताल में सारी सुविधाएं और वेंटिलेटर उपलब्ध हैं, बावजूद इसके नीलम को वहां उपचार नहीं दिया गया।
ईएसआईसी अस्पताल के कर्मचारियों ने मामले में लापरवाही बरती है। सबसे पहले ईएसआईसी अस्पताल के मैनेजमेंट, कर्मचारी और डॉक्टरों ने बड़ी गलती की है।
ईएसआईसी अस्पताल के निदेशक, उस दिन ड्यूटी पर कार्यरत कर्मचारियों और डॉक्टरों को जिम्मेदार मानते हुए कार्रवाई की सिफारिश की गयी है।

जिलाधिकारी सुहास एलवाई ने अपने पत्र में जिला अस्पताल की मुख्य चिकित्सा अधीक्षक वंदना शर्मा को हटाने की भी सिफारिश की है।
नोएडा के ईएसआईसी अस्पताल, जिला अस्पताल और ग्रेटर नोएडा के राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान के अफसरों, डॉक्टरों और कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर, सस्पेंशन और ट्रांसफर करने की सिफारिश की गयी है।
इसके अलावा प्राइवेट अस्पतालों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। सुप्रीम कोर्ट guidelines के मुताबिक टेक्निकल कमेटी अब इसकी जांच करेगी।
ग़ाज़ियाबाद के प्राइवेट अस्पताल पर कार्रवाई के लिए ग़ाज़ियाबाद के जिलाधिकारी को पत्र लिखा गया है।