भारत ने सिंधु जल संधि के तहत पाकिस्तान को एक और बड़ा झटका दिया है। केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर में चेनाब नदी पर अब तक का सबसे बड़ा हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट बनाने को मंजूरी दे दी है। यह परियोजना 1856 मेगावाट की होगी और इसके लिए अब पाकिस्तान से किसी भी प्रकार की अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होगी। यह फैसला ऐसे समय पर आया है जब भारत ने कुछ हफ्ते पहले ही सिंधु जल संधि को निलंबित करने की घोषणा की थी।
पिछले 40 वर्षों से इस परियोजना को लेकर चर्चा चल रही थी, लेकिन पाकिस्तान की आपत्तियों और संधि से जुड़ी जटिलताओं के कारण इसे मंजूरी नहीं मिल पा रही थी। अब सरकार ने इस बाधा को दरकिनार कर इसे हरी झंडी दे दी है। यह प्रोजेक्ट सिर्फ रणनीतिक दृष्टि से नहीं, बल्कि भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लिए भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। जम्मू-कश्मीर जैसे पहाड़ी क्षेत्र में इतनी बड़ी परियोजना का बनना रोजगार, बुनियादी ढांचे और बिजली उत्पादन के लिहाज से भी क्रांतिकारी साबित होगा।
सरकार का यह रुख पाकिस्तान के विरोध के बावजूद जल संसाधनों पर अपने अधिकारों को लेकर एक स्पष्ट संदेश देता है कि अब भारत अपने हितों के लिए निर्णायक और सख्त कदम उठाने में पीछे नहीं हटेगा।यह परियोजना न केवल पाकिस्तान को करारा जवाब है, बल्कि देश की ऊर्जा शक्ति को और मजबूत करेगी।