विपक्षी दल नागरिकता कानून को लेकर जो हो हल्ला मचा रही है, उसपर केंद्र सरकार का कहना है कि CAA और NRC की आड़ में विपक्षी दल अपनी अपनी रोटियां सेक रहे हैं। देश की जनता को गलत इन्फॉरमेशन देकर गुमराह किया जा रहा है। नागरिकता कानून को लेकर गुमराह किए गए लोगों के लिए भाजपा जागरुकता अभियान रैली चला रही है, जिसके तहत वह देश के अलग अलग राज्यों में जाकर लोगों को इस कानून का सही जानकारी दे रही है। कर्नाटक के हुबली में शनिवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपनी रैली में विपक्ष पर जमकर हमला किया।
अमित शाह ने कहा कि, दूसरी बार पीएम बनने के बाद प्रधानमंत्री मोदी जी ने भारत में 70 साल से चली आ रही समस्याओं को हल किया। नागरिकता संशोधन विधेयक संसद में पारित किया गया था। यह विधेयक धार्मिक रूप से प्रताड़ित अल्पसंख्यकों को नागरिकता देता है जो शरणार्थी के रूप में भारत आए हैं। इनमें सिख, हिंदू, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई शामिल हैं।
1950 में, जवाहरलाल नेहरू ने लियाकत अली खान के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए जिसका उद्देश्य दोनों देशों के अल्पसंख्यकों की रक्षा करना और उनकी मुख्यधारा को सुनिश्चित करना था। आज 70 साल बाद भारत ने अपना वादा निभाया। हमारे मुसलमानों, ईसाईयों, जैनियों, बौद्धों, सिखों और अन्य अल्पसंख्यकों के साथ समान अधिकारों के साथ व्यवहार किया गया।
नागरिकात कानून का देश के कई राज्यों में जमकर विरोध प्रदर्शन हो रहा है। इसपर प्रदर्शनकारियों से सवाल पूछते हुए केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि, पाकिस्तान में, (पूर्व और पश्चिम दोनों), 30% हिंदू थे। आज, यह पाकिस्तान में 3% और बांग्लादेश में 7% ही बचे हैं। मैं प्रदर्शनकारियों से पूछना चाहता हूं कि ये अल्पसंख्यक कहां गए? क्या उनमें से कोई जवाब दे सकता है?
कई बलात्कार किए गए। धार्मिक स्थलों को तोड़ दिया गया। अफगानिस्तान में गौतम बुद्ध की एक विशाल मूर्ति थी। इसे सैन्य टैंकों द्वारा उड़ा दिया गया था। पीएम मोदी ने उन्हें बचाने और उन्हें उनके बुनियादी मानवाधिकार देने के लिए यह कानून लाया है। विपक्ष क्यों परेशान कर रहा है? उन्हें केवल अपनी वोट-बैंक की राजनीति करनी है।
अमित शाह ने आगे कहा कि, भारत के प्रथम पीएम जेवाहरलाल नेहरू, प्रथम होम मिनिस्टर सरदार पटेल और प्रथम अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद जी ने वादा किया था कि हम इन अल्पसंख्यकों को नागरिकता देंगे। मौलाना आज़ाद ने इन अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने का भी वादा किया था, और इसलिए आचार्य कृपलिनी थे। इसके बाद अमित शाह ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि, राहुल गांधी, ये सभी नेता कांग्रेस से हैं। आपने अपने पूर्वजों के इन वादों को पूरा नहीं किया। इसे आज पीएम मोदी पूरा कर रहे हैं।
यहां तक कि राष्ट्र के पिता, महात्मा गांधी ने 26 सितंबर, 1947 को कहा था कि, पूर्वी और पश्चिमी पाकिस्तान में रहने वाले हिंदुओं और सिखों को भारत वापस आने के सभी अधिकार हैं। यदि वे वहां रहना नहीं चाहते हैं और यदि उनके साथ समान व्यवहार नहीं किया जाता है तो भारत में वापस आने का उन्हें पूरा अधिकार है।
इन शरणार्थियों में से 70% दलित हैं। मैं उन प्रदर्शनकारियों से पूछना चाहता हूं जो सीएए के खिलाफ हैं- इन दलितों के खिलाफ प्रदर्शन करने से आपको क्या फायदा होगा? एंटी-सीएए दलित विरोधी भी है।
कांग्रेस पार्टी कट्टरता का अभ्यास करती है। पिछले साल राजस्थान चुनाव से पहले कांग्रेस के घोषणा पत्र में कहा गया था कि, राजस्थान में हिंदू और सिख शरणार्थियों को नागरिकता प्रदान की जाएगी। औज वही अशोक गहलोत और राहुल गांधी इस अधिनियम का विरोध कर रहे हैं।
सीएए में भारत में मुसलमानों की नागरिकता छीनने का कोई खंड ही नहीं है। प्रदर्शन के दौरान लोग सड़कों पर उतर गए और पुलिस से भी हाथापाई कर रहे हैं। इसके लिए जिम्मेदार सिर्फ और सिर्फ राहुल गांधी, अरविंद केजरीवाल, ममता बनर्जी, कम्युनिस्ट, सपा, बसपा हैं।