देश की राजधानी दिल्ली की सीमाओं पर किसान आंदोलन को दो महीने होने जा रहे है। केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीन नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसान नेताओं और सरकार के बीच नौ दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है।
तो वही दूसरी और किसान आंदोलन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है। इसके अलावा किसान और सरकार के बीच कल मंगलवार को 10वें दौर की वार्ता होनी है।
कल होने वाली किसान और सरकार के बीच बातचीत को लेकर कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर का बड़ा बयान आया है। उन्होंने कहा कल होने वाली किसान और सरकार के बीच बातचीत को लेकर कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा है कि किसान सरकार से कृषि कानूनों को वापस लेने के अलावा जो चाहे मांग सकते हैं।
कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार जब कोई कानून बनाती है तो वह कानून पूरे देश के लिए होता है। ये तीनों नए कृषि कानून भी देश के लिए ही बनाए गए हैं और इन कानूनों पर देश के ज्यादातर किसान, विद्वान, वैज्ञानिक और कृषि के क्षेत्र में काम करने वाले लोग सहमत हैं। किसान कल अगले दौर की बैठक में कृषि कानून के हर पहलुओं पर खुलकर चर्चा कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी तीनों कृषि कानूनों को लागू करने पर रोक लगा दिया है। उनकी अपेक्षा है कि किसान 19 तारीख को हर मुद्दे पर चर्चा करें, किसान कानून वापसी के अलावा और क्या ऑप्शन चाहते हैं, उन्हें सरकार के सामने प्रस्तुत करें, तो सरकार जरूर पूरी गंभीरता के साथ उनकी समस्याओं और उनकी आपत्ति पर विचार करने को खुले मन से तैयार है।
नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि सरकार मंडियों, व्यापारियों के रजिस्ट्रेशन और अन्य मुद्दों से जुड़ी किसानों की चिन्ताओं का समाधान करने के लिए तैयार है, इस बारे में किसान संगठनों को प्रस्ताव भेजा जा चुका है।
उन्होंने कहा कि सरकार किसानों के साथ पराली जलाने और बिजली के मुद्दों पर भी बात करने को तैयार है. लेकिन किसान संगठन कृषि कानूनों को वापस लेने पर अड़े हुए हैं।
तो वही दूसरी ओर किसानओ का कहना है कि जब तक कृषि कानून को केंद्र सरकार वापस नहीं लेगी तब तक वह अपना प्रदर्शन चालू रखगे। किसानों ने आशंका जताई है कि नए कानून एमएसपी के सुरक्षा घेरे को समाप्त करने और मंडी प्रणाली को बंद करने का रास्ता साफ करेंगे।