{ आगरा से ओपी वरुण की रिपोर्ट }
आगरा में कोरोना वायरस के चलते आमो खास का जीवन प्रभावित हुआ है, सभी बेबसी का जीवन गुजरने को मजबूर है। हर व्यक्ति आजादी से जीवन जीना चाहता है जिसमे पूरी आजादी हो लेकिन आज उसी आजादी के लिए देश बेबसी का जीवन गुजर रहा है।
ये बात यही तक होती तो ठीक होता लेकिन कोरोना वायरस का असर पूरे देश पर इस कदर पड़ा है कि जिससे बेबसी और लाचारी का जीवन गुजार रहे लोग ही नही बल्कि वो आत्माये भी प्रभावित है जो इस दुनियां को छोड़ चुकी है।
लेकिन कोरोना वायरस उन पूण्य आत्माओ ओर मोक्ष के बीच बांध बन बैठा है, आगरा के सबसे बड़े मोक्ष धाम की बात करे तो यहां का नजारा भी आबादी वाले इलाकों जैसा वीरान ओर सुनसान दिख रहा है।
चारो तरफ सन्नाटा ओर जलती चिताए दिखाई देती है साथ ही शमशान घाट के फुलघर मे लॉक डाउन के कारण इकट्ठा अस्थि कलश अपने लोगो का इंतजार करते दिखाई दिए की कब लॉक डाउन खुलेगा ओर कब इनके घर वाले इनकी अस्थियो को पवित्रं नदी गंगा में प्रवाहित करेंगे।
फिलहाल लॉक डाउन का असर आगरा के शमशान घाटो पर भी देखा जा सकता है,कभी अंतिम यात्रा में जुटने वाली भीड़ से आपसी मेल प्रेम और दुनिया छोड़ कर जाने वाले कि सामाजिक आर्थिक और राजनीतिक स्थिति का पता चलता था।
कोरोना के चलते अब वो सब खत्म होता दिख रहा है, अब अंतिम यात्रा में 5 लोगो की भीड़ को समझदारी का सम्मान मिल रह है कोई भी इस घटती संख्या पर उगली उठाना अक्लमन्दी नही समझता।
एक अदृश्य वायरस ने पूरी दुनिया के सारे नियमो को उलट पलट कर रख दिया है फिलहाल श्मशान घाट पर सेकड़ो अस्थियां आने मोक्ष का इंतजार कर रही है कि कब कोरोना पर महाकाल की नजर पड़ेगी कब उसका खत्म होगा और कब बन्दिशों से आम इंसान मुक्त होगा और कब वो अपनो को मोक्ष के द्वार ले जायेंगे।