नई दिल्ली : अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के दौरान राष्ट्रपति अशरफ गनी आवाम को छोड़ यूएई में शरण में लिये हुए है। जिससे वो अपनी जान बचा सकें। वहीं पंजशीर के शेर अमरूल्लाह सालेह ने गनी के भागने के बाद खुद को अफगानिस्तान का कार्यकारी राष्ट्रपति नियुक्त किया। और तालिबान को नाकों चने चबवाई। जिससे वो परेशान हो गया है। और उसने अपने अधिकतर लड़ाकों को पंजशीर पर कब्जा जमाने को भेजा है, जहां उसे अभी मुंह की खानी पड़ रही है।
इसी बीच अफगानिस्तान (Afghanistan) के कार्यकारी राष्ट्रपति अमरुल्ला सालेह का बड़ा बयान सामने आया है। अमरुल्ला सालेह (Amarullah Saleh) का कहना है कि तालिबान जो दावा कर रहा है कि उसने पंजशीर के कुछ हिस्से को अपने कब्जे में ले लिया है, वह बिल्कुल गलत है। हम पूरी तरह कंट्रोल में हैं, पंजशीर के लोगों का जोश पूरी तरह से हाई है।
उन्होंने कहा कि पंजशीर के लोग तालिबान के सामने झुकने के लिए तैयार नहीं हैं। हम हर तरह की बातचीत के लिए तैयार हैं, हम अपने इलाके में शांति चाहते हैं। लेकिन अगर तालिबान लड़ाई चाहता है, तो हम लड़ने के लिए भी तैयार हैं।
“तालिबान जंग चाहेगा तो जंग होगी’’
अमरुल्ला सालेह ने कहा कि अहमद मसूद इस वक्त अपने पिता की तरह तालिबान के खिलाफ लड़ रहे हैं, हर कोई उसके साथ खड़ा है। मैं भी यहां पर मौजूद हूं, हर कोई यहां पर एकजुट है। हमने सबकुछ तालिबान के ऊपर छोड़ दिया है, अगर वो जंग चाहेंगे तो जंग होगी और वो बातचीत चाहेंगे तो शांति के साथ बातचीत होगी।
स्थानीय हालात और भविष्य को लेकर अमरुल्ला सालेह ने कहा कि मौजूदा स्थिति काफी अजीब है क्योंकि राष्ट्रपति समेत पूरी कैबिनेट देश छोड़कर चली गई है। राष्ट्रपति अशरफ गनी ने लोगों को धोखा दिया और वो देश से बाहर चले गए। लेकिन हमारा मोटो सिर्फ एक ही है, हम किसी तरह की तानाशाही बर्दाश्त नहीं करेंगे।
”तालिबिस्तान नहीं बनने देंगे”
अमरुल्ला सालेह ने कहा कि हम चाहते हैं कि हमारे लोगों को खुलकर जीने का मौका मिले, हम अफगानिस्तान को तालिबिस्तान नहीं बनना देना चाहते हैं। हम चाहते हैं कि अफगानी लोगों को उनकी बात कहने का मौका मिले, ये सब तानाशाही में नहीं हो सकता है।
आपको बता दें कि अमरुल्ला सालेह भी इस वक्त पंजशीर में रुके हुए हैं, वह अहमद मसूद की अगुवाई में नॉर्दर्न एलायंस के साथ मिलकर तालिबान के खिलाफ लड़ रहे हैं। अशरफ गनी के देश छोड़ने के बाद अमरुल्ला सालेह ने खुद को कार्यकारी राष्ट्रपति घोषित किया है। ‘शेर-ए-पंजशीर’ अहमद शाह मसूद के बेटे अहमद मसूद की अगुवाई में नॉर्दर्न एलायंस (Northern Alliance) इस जगह तालिबान को कड़ी चुनौती दे रहा है। अफगानिस्तान के कार्यकारी राष्ट्रपति अमरुल्ला सालेह भी अपने लोगों के साथ यहां पर हैं।
अब नॉर्दर्न एलायंस को तालिबान के खिलाफ जंग लड़ने में और भी मजबूती मिली है। अफगानी सेना के पूर्व कमांडर्स ने अब पंजशीर पहुंचकर अहमद मसूद (Ahmad Massaud) की सेना से हाथ मिला लिया है और अब वे सब तालिबान के खिलाफ जंग लड़ने को तैयार हैं।
हेलिकॉप्टर से पहुंचाई जा रही है मदद
रिपोर्ट्स के मुताबिक, तालिबानी विरोधी गुट की मदद करने के लिए पूर्व उपराष्ट्रपति अहमद जिया मसूद और नॉर्दर्न एलायंस के पूर्व कमांडर अमानुल्लाह गुलजार पंजशीर पहुंचे हैं। उनके साथ उनके समर्थक और लड़ाके भी हैं। ये सभी अब अहमद मसूद की अगुवाई में नॉर्दर्न एलायंस का साथ देंगे, जो इस वक्त तालिबान के खिलाफ मोर्चा संभाले हुए हैं।
बता दें कि ये दोनों अपने समर्थकों के साथ ताजिकिस्तान के जरिए पंजशीर पहुंचे हैं। ताजिकिस्तान से हेलिकॉप्टर के जरिए ये मदद पहुंचाई गई है, इनके साथ कई हथियार भी लाए गए हैं। ताजिकिस्तान की ओर से लगातार नॉर्दर्न एलायंस को मदद पहुंचाई जा रही है, इनमें हथियार और इन्फॉर्मेशन शामिल हैं। हथियारों के अलावा ताजिकिस्तान ने हेलिकॉप्टर भी पहुंचाए हैं।
पंजशीर में मात खा रहा है तालिबान
तालिबान अफगानिस्तान के हर प्रांत पर कब्जा कर चुका है, बस पंजशीर उससे दूर है। पंजशीर, अंद्राब, बगलान समेत अन्य कुछ इलाकों में नॉर्दर्न एलायंस के लड़ाकों ने तालिबान को कड़ी चुनौती दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन जगहों पर करीब 300 से अधिक तालिबानियों को मार भी गिराया गया। यही कारण है कि तालिबान को बड़ा झटका लगा है।