हाथरस मामले पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो रही है। 19 वर्षीय दलित और कथित गैंगरेप और मौत केस में सीबीआई जांच और एसआईटी से जांच कराने की मांग को लेकर सप्रीम कोर्ट में मंगलवार 6 अक्टूबर को हो रही है।
याचिकाकर्ताओं की मांग है कि हाथरस कांड की जांच CBI और SIT करे, इसके साथ ही ये पूरी जांच जज की निगरानी में हो। उन्होंने यह भी मांग की है कि केस का पूरा ट्रायल उत्तर प्रदेश में नहीं बल्कि दिल्ली में चले।
इसी बीच उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हाथरस मामले पर हलफनामा दाखिल किया है। जिसमें उन्होंने पीड़िता के देर रात अंतिम संस्कार से लेकर दंगे तक की बात बताई है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने हाथरस की घटना को लेकर सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर किया, जिसमें कहा गया कि अदालत को मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच के लिए सीबीआई जांच का निर्देश देना चाहिए।
हलफनामे में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट को CBI जांच की निगरानी करनी चाहिए।
उत्तर प्रदेश सरकार ने पीड़िता के देर रात अंतिम संस्कार करने पर कहा है कि सांप्रदायिक दंगे से बचने के लिए ऐसा किया गया।
यूपी सरकार ने SC को हलफनामा में बताया है कि जिला प्रशासन ने मृतका के माता-पिता को 29 सितंबर 2020 की रात में बड़े पैमाने पर हिंसा से बचने के लिए रात में ही अंतिम संस्कार करने के लिए मना लिया था।
यूपी सरकार ने SC को हलफनामा में बताया कि पीड़िता का अंतिम संस्कार अगर सुबह होता तो वहां लाखों की संख्या में प्रदर्शनकारी जमा होते।
खुफिया विभाग ने हमें ये इनपुट दिया था। इसलिए जाति / सांप्रदायिक दंगे से बचने के लिए पीड़िता का अंतिम संस्कार किया गया।
कोर्ट में सरकार ने बताया कि इस पूरे मामले में इंसाफ की आड़ कुछ लोग सांप्रदायिक हिंसा करवाना चाहते हैं।