कोरोना संकट काल मे मजदूरों की दुश्वारियां कम होने का नाम नही ले रही है। लॉक डाउन के बीच दूसरे राज्यों से व जनपदों से आकर फैक्ट्री में काम करने वाले व दिहाड़ी मजदूर पलायन करने को मजबूर हो रहे है। ‘
मजदूरों के सामने रहने पैसों के साथ साथ रहने खाने जैसी समस्याओं से मजबूर होकर पैदल ही निकल लिए है। सरकार द्वारा दी जा रही राहत सामग्री मजदूरों के लिए नाकाफ़ी साबित हो रही है।
कंधों पर बैग टांगे और पैरों के छाले दिखाते ये मजदूर लॉक डाउन में पैदल चल कर अपने अपने घरों को ओर रवाना है।
राजधानी लखनऊ व आसपास इलाकों की फैक्ट्री में काम करने वाले गैर प्रान्तो के रहने वाले मजदूरों का सब्र जवाब दे चुका है।
बिहार व अन्य जगह के रहने वाले मजदूर हाइवे से होते हुए पैदल ही रवाना है। बोरा फैक्ट्री में काम करने वाले मजदूरों का कहना है कि दो से तीन महीने से काम कर रहे थे लॉक डाउन में फॉक्ट्री बंद हो गई काम नही हो रहा और जो पैसे थे वो भी खत्म हो चुके है।
रहने खाने की समस्या के साथ पैसे न होना जिससे उनको यंहा से जाना पड़ रहा है। सरकारी खाना कभी मिलता है कभी नही मिलता जिससे खाना न मिलने से दो-दो दिन भूखे सोना पड़ता है।हाइवे पर चलने वाले मजदूरों की लगभग यही कहानी है।