बालाघाट जिले के ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में तेंदूपत्ता संग्रहण इन दिनों लोगों के लिए आय का प्रमुख साधन बना हुआ है। हर वर्ष गर्मियों के मौसम में ग्रामीण परिवार जंगलों से तेंदूपत्ता तोड़कर उसे पुड़ों में बांधकर समितियों के फड़ मुंशी को जमा करते हैं, जिसके बदले उन्हें आर्थिक लाभ प्राप्त होता है। यह कार्य न केवल रोजगार उपलब्ध कराता है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देता है।
तेंदूपत्ता संग्रहण कार्य में महिलाओं की भागीदारी इस बार विशेष रूप से देखने को मिल रही है। ग्रामीण महिलाएं बड़ी संख्या में जंगलों में पहुंचकर तेंदूपत्ता तोड़ने और पुड़े तैयार करने का कार्य कर रही हैं। इससे महिलाओं को घर की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में मदद मिल रही है और उन्हें अतिरिक्त आय का स्रोत भी प्राप्त हो रहा है।
बिरसा वन परिक्षेत्र अधिकारी शरणागत ने जानकारी देते हुए बताया कि बिरसा वन परिक्षेत्र अंतर्गत आने वाली छह समितियों में तेंदूपत्ता संग्रहण का लक्ष्य लगभग पूरा कर लिया गया है। विभाग द्वारा इस वर्ष संग्रहण कार्य को बेहतर तरीके से संचालित किया गया, जिससे ग्रामीणों को भी लाभ मिला।
उन्होंने बताया कि पूर्व वर्षों में तेंदूपत्ता तोड़ाई के दौरान वन्य प्राणियों के हमले की घटनाएं सामने आती थीं। लेकिन इस बार वन विभाग ने ग्रामीणों को पहले से ही सतर्कता और सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देश दिए थे। ग्रामीणों ने इन सुझावों का पालन करते हुए सावधानी बरती, जिसके चलते इस वर्ष किसी भी अप्रिय घटना की सूचना सामने नहीं आई।
तेंदूपत्ता संग्रहण कार्य से बड़ी संख्या में ग्रामीण परिवारों को मौसमी रोजगार मिल रहा है। खासतौर पर आदिवासी क्षेत्रों में यह कार्य लोगों की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। वन विभाग और समितियों के सहयोग से ग्रामीणों को समय पर भुगतान मिलने की उम्मीद भी जताई जा रही है।