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25 फीट गहरे कुएं से पानी भरने को मजबूर आदिवासी परिवार, सरकारी दावों पर उठे सवाल

बुरहानपुर जिले के धूलकोट क्षेत्र स्थित रेखालिया झिरा फालिया में 45 आदिवासी परिवार आज भी पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। गांव में नल जल योजना का लाभ नहीं पहुंचा है, जिसके चलते ग्रामीण एक गहरे कुएं के गंदे पानी पर निर्भर हैं। पानी का स्तर नीचे जाने से मासूम बच्चे करीब 25 फीट गहरे कुएं में उतरकर पानी भरने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने पंचायत और प्रशासन पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं, वहीं प्रशासन ने जल्द वैकल्पिक पेयजल व्यवस्था कराने का आश्वासन दिया है।

By: Nivedita 
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25 फीट गहरे कुएं से पानी भरने को मजबूर आदिवासी परिवार, सरकारी दावों पर उठे सवाल

बुरहानपुर जिले के आदिवासी बाहुल्य धूलकोट क्षेत्र से सामने आई तस्वीरें जल जीवन मिशन के दावों पर सवाल खड़े कर रही हैं। ग्राम पंचायत भगवानिया के रेखालिया झिरा फालिया में रहने वाले करीब 45 आदिवासी परिवार आज भी मूलभूत पेयजल सुविधा से वंचित हैं। गांव में न तो नल जल योजना का लाभ पहुंचा है और न ही साफ पानी की स्थायी व्यवस्था हो पाई है।

मासूम बच्चों की जान जोखिम में

भीषण गर्मी के बीच गांव का एकमात्र सहारा एक पुराना कुआं बना हुआ है। पानी का स्तर काफी नीचे चले जाने के कारण बच्चे और ग्रामीण करीब 25 फीट गहरे कुएं में उतरकर पानी भरने को मजबूर हैं। रस्सियों के सहारे नीचे उतरते बच्चों की यह तस्वीरें किसी बड़े हादसे की आशंका को भी बढ़ा रही हैं।

ग्रामीणों ने लगाए लापरवाही के आरोप

ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत और प्रशासन से कई बार कुएं के गहरीकरण और पेयजल व्यवस्था की मांग की गई, लेकिन अब तक सिर्फ आश्वासन ही मिला। उनका आरोप है कि समय रहते उचित कदम उठाए जाते तो लोगों को इस तरह जान जोखिम में डालकर पानी नहीं भरना पड़ता।

गंदा पानी पीने से बढ़ रही परेशानी

ग्रामीण महिलाओं ने बताया कि मजबूरी में परिवारों को गंदा पानी इस्तेमाल करना पड़ रहा है, जिससे बच्चों के बीमार होने का खतरा बना रहता है। गांव में टैंकर व्यवस्था भी नियमित नहीं है और बिजली की समस्या अलग से बनी हुई है।

राजनीतिक बयानबाजी भी तेज

मामले को लेकर कांग्रेस नेता अजय रघुवंशी ने प्रशासन और पंचायत पर आदिवासी क्षेत्रों की अनदेखी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि योजनाओं के बड़े-बड़े दावे केवल कागजों तक सीमित हैं, जबकि जमीनी हालात बेहद खराब हैं।

प्रशासन ने दिया कार्रवाई का आश्वासन

मामले पर प्रशासन की ओर से अधिकारियों ने जल्द वैकल्पिक पेयजल व्यवस्था और आवश्यक कार्रवाई का भरोसा दिलाया है। अधिकारियों का कहना है कि ग्रामीणों की समस्या को प्राथमिकता के आधार पर हल करने का प्रयास किया जाएगा।

सवाल अब भी कायम

सरकार जहां हर घर तक नल से जल पहुंचाने का दावा कर रही है, वहीं धूलकोट क्षेत्र की यह तस्वीरें ग्रामीण इलाकों की वास्तविक स्थिति को उजागर कर रही हैं। अब सवाल यह है कि आखिर इन आदिवासी परिवारों को सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल सुविधा कब तक मिल पाएगी।

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