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प्लास्टिक की बोतल का पानी: सेहत के लिए वरदान या कैंसर का कारण?

प्लास्टिक की बोतलों में पैक पानी को लेकर स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, गर्मी और धूप के संपर्क में आने पर सिंगल-यूज़ प्लास्टिक बोतलों से माइक्रोप्लास्टिक कण पानी में मिल सकते हैं, जो शरीर में पहुंचकर दीर्घकालिक स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकते हैं। एक कार्यक्रम में डीएम राजेंद्र पेंसिया ने भी प्लास्टिक बोतलों के अत्यधिक उपयोग से होने वाले संभावित खतरों पर जागरूकता बढ़ाने की अपील की। उन्होंने लोगों को स्टील, तांबे या कांच की बोतलों का उपयोग करने और सिंगल-यूज़ प्लास्टिक से दूरी बनाने की सलाह दी।

By: Nivedita 
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प्लास्टिक की बोतल का पानी: सेहत के लिए वरदान या कैंसर का कारण?

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर (बोतलबंद पानी) हमारी जीवनशैली का एक अहम हिस्सा बन चुका है। सफर हो या कोई कार्यक्रम, हम तुरंत प्लास्टिक की बोतल खरीदते हैं और पानी पी लेते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह साफ दिखने वाला पानी हमारे शरीर में धीमा जहर घोल रहा है?
हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान डीएम राजेंद्र पेंसिया जी ने सिंगल-यूज़ प्लास्टिक की बोतलों से होने वाले गंभीर स्वास्थ्य खतरों के बारे में बेहद चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।

1 लीटर पानी और 2.5 लाख माइक्रोप्लास्टिक!

डीएम राजेंद्र पेंसिया जी के अनुसार, जब हम बाजार से खरीदी गई 1 लीटर पानी की प्लास्टिक बोतल से पानी पीते हैं, तो हम केवल पानी नहीं पी रहे होते। उस 1 लीटर पानी के साथ लगभग ढाई लाख (2,50,000) माइक्रोप्लास्टिक के कण हमारे शरीर के अंदर चले जाते हैं। यह मात्रा इतनी बड़ी है कि जो हमारे आंतरिक अंगों को धीरे-धीरे नुकसान पहुँचाने के लिए काफी है।

‘कूल प्लेस’ की चेतावनी और जमीनी हकीकत

अगर आप पानी की बोतलों को ध्यान से देखें, तो उन पर एक निर्देश लिखा होता है—”Keep in a cool place” (इसे ठंडी या सामान्य जगह पर रखें)। लेकिन असल जिंदगी में ऐसा नहीं होता। फैक्ट्री से निकलने के बाद ये बोतलें ट्रकों और गोदामों में अत्यधिक गर्मी और धूप का सामना करती हैं। सफर के दौरान ये बार-बार गर्म होती हैं और फिर ठंडी होती हैं। तापमान का यह उतार-चढ़ाव ही सबसे बड़ी समस्या की जड़ है।

सिंगल-यूज़ प्लास्टिक का खतरनाक गुण

सिंगल-यूज़ प्लास्टिक (एक बार इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक) की यह विशेषता होती है कि वह जितनी बार गर्म होगा, उतनी ही बार वह अंदर से पिघलेगा। जब ये बोतलें धूप या गर्मी में रहती हैं, तो प्लास्टिक के सूक्ष्म कण (माइक्रोप्लास्टिक) पानी में घुल जाते हैं। जब हम उस पानी का सेवन करते हैं, तो वह प्लास्टिक सीधे हमारे शरीर के अंदर प्रवेश कर जाता है।

बिना किसी लत के भी बढ़ रहा है कैंसर का खतरा

पहले के समय में कैंसर जैसी बीमारियाँ किसी गाँव में मुश्किल से किसी एक व्यक्ति को होती थीं, और शहरों में भी इसके गिने-चुने मामले ही सामने आते थे। लेकिन आज स्थिति बदल चुकी है। आज हर गली, मोहल्ले और गाँव में कैंसर के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।

राजेंद्र पेंसिया जी कहते हैं कि भले ही आप किसी भी प्रकार का नशा या धूम्रपान न करते हों, लेकिन यदि आप लगातार इन प्लास्टिक बोतलों का पानी पी रहे हैं, तो यह माइक्रोप्लास्टिक आपके शरीर में जाकर कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी को जन्म दे सकता है। आज बढ़ते कैंसर के मामलों का एक बहुत बड़ा कारण यही माइक्रोप्लास्टिक है।

निष्कर्ष और बचाव

यह वीडियो हमें सचेत करता है कि प्लास्टिक की बोतलों का अत्यधिक उपयोग हमारे स्वास्थ्य के लिए कितना घातक है। अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा के लिए सिंगल-यूज़ प्लास्टिक की बोतलों का उपयोग तुरंत बंद करें। सफर में हमेशा अपने साथ तांबे, स्टील या कांच की बोतल रखें और इस अदृश्य खतरे से खुद को सुरक्षित रखें।

 

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