पन्ना । मध्य प्रदेश का पन्ना जिला दुनियाभर में अपने जेम क्वालिटी हीरों के लिए प्रसिद्ध है। यहां की धरती ने कई लोगों की किस्मत बदली है। यही वजह है कि अब जिले के कई किसान पारंपरिक खेती छोड़कर अपने खेतों में हीरे की खदान लगाकर किस्मत आजमा रहे हैं। मनोर पंचायत के जरुआपुर, बृजपुर और सरकोहा जैसे क्षेत्रों में किसान फल-सब्जियों की खेती के बजाय जमीन से हीरा निकालने की उम्मीद में खुदाई कर रहे हैं। हालांकि यह काम पूरी तरह किस्मत पर निर्भर है, जहां कुछ लोगों को बड़ी सफलता मिली तो कई किसान आज भी संघर्ष कर रहे हैं।
जरुआपुर के सरपंच प्रकाश मजूमदार ऐसे ही किसानों में शामिल हैं, जिन्हें अब तक छोटे-बड़े मिलाकर 12 से अधिक हीरे मिल चुके हैं। वर्ष 2024 में उन्हें मिला 16.10 कैरेट का हीरा 86 लाख रुपये से अधिक कीमत में नीलाम हुआ था। इसी तरह किसान दिलीप मिस्त्री को वर्ष 2023 में 8 कैरेट का बड़ा हीरा मिला था। इन सफलताओं ने आसपास के किसानों को भी हीरे की तलाश के लिए प्रेरित किया है।
किसान अपनी जमीन पर या फिर किसी अन्य की जमीन को साझेदारी के आधार पर लेकर हीरा कार्यालय से पट्टा बनवाते हैं। इसके बाद खदान तैयार कर खुदाई शुरू की जाती है। प्रकाश मजूमदार के अनुसार, हीरा निकालने का काम पूरी तरह अनिश्चितताओं से भरा हुआ है। कई बार महीनों की मेहनत के बाद भी हाथ खाली रह जाते हैं और मजदूरी सहित अन्य खर्चों के कारण किसान कर्ज में भी फंस जाते हैं।

हीरा कारोबार पर अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का भी असर देखने को मिल रहा है। बाजार में उतार-चढ़ाव के कारण पन्ना की सरकारी हीरा नीलामी प्रभावित हुई है, जिससे हीरा मिलने के बाद भी किसानों और पट्टाधारकों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
किसान दिलीप मिस्त्री का कहना है कि फल और सब्जियों की खेती में कम से कम आमदनी की संभावना बनी रहती है, लेकिन हीरे की तलाश में यह तय नहीं होता कि मेहनत का परिणाम मिलेगा या नहीं।उन्होंने कहा कि हीरे की खुदाई में सफलता मेहनत के साथ-साथ किस्मत पर भी निर्भर करती है। हालांकि उम्मीद के चलते किसान इस काम से जुड़े हुए हैं।
तमाम चुनौतियों के बावजूद किसानों का हीरे वाली जमीन पर भरोसा कायम है। वर्ष 2026 में हीरा कार्यालय द्वारा करीब 300 नए पट्टे जारी किए गए हैं, जिनमें 125 पट्टे निजी खेतों के लिए बताए जा रहे हैं। अब देखने वाली बात होगी कि पन्ना की यह चमकीली धरती कितने किसानों की किस्मत बदलती है और कितनों के लिए यह संघर्ष का कारण बनती है।