{ वाराणसी से मदन मोहन शर्मा की रिपोर्ट }
वासंतिक नवरात्र के नौवे दिन माँ सिद्धदात्री का दर्शन का विधान है. वाराणसी में माँ सिद्धदात्री के रूप में मैदागिन में अति प्राचीन मंदिर में विद्यमान है. वाराणसी में माँ के रूप में सिद्धदात्री के दर्शनों से नवो दिनों के दर्शनों का फल मिलता है .
यहाँ माँ के बेहद भव्य स्वरुप का दर्शन होता है. माँ को कार्य व मनोकामना सिद्ध करने की देवी माना जाता है . इसी लिए यहा भक्त माँ के मंदिर में सिद्धि करके माँ को प्रशन्न करते है और अपनी इक्षा के अनुसार माँ से वर पाते है.
यहाँ माँ को नारियल बलि के रूप में चडाने का विशेष महत्व है . माँ को चुनरी के साथ लाल अड़हुल की माला व मिष्ठान भी भोग लगाया जाता है. जिससे माँ अपने भक्तो को हमेशा प्रशन्न रहती है और कोई कमी नहीं रहती है. नवरात्रि के नौवे दिन देखने को मिला.
मंदिर में चारों तरफ सन्नाटा पसरा हुआ था और सिर्फ मंदिर पुजारी ही औपचारिकतावस मंदिर में पूजन पाठ और माँ सिद्धदात्री की आरती करते नजर आए। पुजारियों की मानें तो उन्होंने अपने जीवन में कभी ऐसा नजारा नहीं देखा था।