प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को भगवान श्रीराम के जन्म के मुहूर्त में भूमि पूजन करेंगे। यह मुहूर्त कुल 32 सेकंड का है। कुल 22 आचार्य तीन घंटे में पूजन संपन्न कराएंगे। ज्योतिषीय पक्ष के मुताबिक षोडश वरदानुसार 15 वरद में ग्रह स्थितियां अनुकूल हैं। इस समय पूजन के शुभ परिणाम देंगे।
वैदिक रीति से अनुष्ठान
वैदिक रीति से संपूर्ण अनुष्ठान में तीन से साढ़े तीन घंटे का समय लगता है। सभी कर्मकांड पूर्व तय यजमान के द्वारा संपन्न होंगे। मुख्य अतिथि के रूप में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अंतिम क्षण में स्पर्श कर भूमि पूजन और शिला पूजन की विधि पूर्ण करेंगे।
देशभर से बुलाए गए विद्वान आचार्य
भूमि पूजन के मुख्य आचार्य काशी के विद्वान पंडित जयप्रकाश उपाध्याय हैं। उनके सहयोगी काशी के अरुण दीक्षित, कांची मठ के सेनापति शास्त्री, सुब्रमण्यम और मणिजी के अलावा अयोध्या के पंडित इंद्रदेव मिश्र व दिल्ली के चंद्रभानु शर्मा होंगे। पूजन में देशभर के कई स्थानों से बुलाए गए कुल 22 आचार्य शामिल होंगे। यह सभी रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के कोषाध्यक्ष महंत र्गोंवद देव गिरि के निर्देशन में अनुष्ठान करा रहे हैं।
ऐसे होगा पूजन
महागणपति-अम्बिका पूजन, वरुण पूजन, षोडश मात्रिका पूजन, सप्तघृत मात्रिका पूजन, आयुष मंत्र जप, नींव में प्रतिष्ठित की जाने वाली नौ प्रस्तर खंड शिलाओं का संस्कार और पूजन, ग्रह शांति, शिलाओं के देवता के निमित्त आहुति दी जाएगी। मुहूर्त का काल मध्याह्न 12:44:08 बजे से शुरू होकर 12:44:40 के मध्य का है। अभिजीत मुहूर्त प्राय: प्रतिदिन पूर्वाह्न 11.45 बजे से 12.45 बजे के बीच होता है। इसकी अवधि 48 मिनट मानी गई है। इसी मुहूर्त में भगवान राम का जन्म ठीक दोपहर 12 बजे हुआ था।
राममय हुई अयोध्या :
राम जन्मभूमि में विराजमान रामलला के मंदिर के निर्माण कार्य का शुभारंभ करने आ रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आने से पहले अयोध्या ‘राममय’ हो गई है। हर तरफ पीले रंग से सजे घरों और मंदिरों के भवन अयोध्या में आस्था के नए सूर्योदय का संकेत दे रहे हैं। धर्मनगरी की सड़कों और गलियों में रामचरित मानस की चौपाइयां गूंज रही हैं। विभिन्न आश्रमों और मंदिरों में संतों के साथ श्रद्धालु रामधुन का गायन कर भावविभोर हो रहे हैं। लग रहा है मानो दीवाली है या फिर होली पर्व जैसा उल्लास हर तरफ छाया हुआ है। सभी को बुधवार को प्रधानमंत्री के हाथों मंदिर निर्माण शुरू होने का इंतजार है।
सरयू तट पर भी अलग ही नजारा है। सुबह से ही नदी में स्नान के लिए पहुंचे श्रद्धालु, संत और स्थानीय लोग मंदिर निर्माण शुरू होने की खुशी से लबरेज दिखे। घाटों पर पंडों के बीच सिर्फ मोदी के आने और मंदिर निर्माण के उल्लास से जुड़ी बातें होती रहीं। सरयू घाट पर तमाम पुजारी भी शुभ घड़ी के नजदीक आ जाने से प्रफुल्लित रहे। घाट पर स्नान के लिए आए संत रामभद्र दास ने कहा कि घाट पर पहुंचने के बाद महसूस हुआ कि राम मंदिर निर्माण शुरू होने की खुशी से सरयू नदी भी हिलोरे ले रही है।
रामजन्मभूमि, हनुमानगढ़ी, कनक भवन समेत अन्य मंदिरों में मंगलवार को भी दर्शन-पूजन रोज की ही तरह चलता रहा लेकिन उल्लास का स्वरूप कुछ अलग था। मंदिरों के आसपास मौजूद मीडिया के कैमरे आम दर्शनार्थियों की भी उत्सुकता बढ़ा दे रहे थे। फूल-माला और प्रसाद की दुकानों पर विक्रेता व श्रद्धालुओं के बीच मंदिर निर्माण शुरू होने से जुड़े संवाद ही होते रहे।
हर तरफ सजावट :
प्रधानमंत्री के स्वागत के लिए अयोध्या सज-संवर कर भी तैयार हो गई है। मोदी के गुजरने वाले रास्तों पर भी सजावट की गई है। दीवारों पर रामायण कालीन प्रसंगों की आकृति अलग ही शोभा बिखेर रही है। सड़कें साफ-सुथरी नजर आ रही हैं। सरयू तट के किनारे की सजावट सभी को आकर्षित कर रही है। राम की पैड़ी रंगोलियों से संवर गई है। बुधवार को दीपोत्सव मनाने के लिए दीपक भी राम की पैड़ी के घाटों पर सजा दिए गए हैं।