कोरोना काल में जहा आम लोग आर्थिक तंगी से जूझ रहे है वही प्राइवेट स्कूलों ने फीस के नाम पर मन चाही वसूली शुरू कर दी है. जिसके खिलाफ सरकार ने सख्त कदम उठए है. स्कूलों के खिलाफ जांच शुरू हो गई है। स्कूलों ने किताबो और फीस के नाम पर स्कूल फीस बड़ाई है। शिकयत मिलने पर राज्य सर्कार ने जांच सुरु कर दी है।
एनसीईआरटी की किताबों के साथ-साथ महंगी किताबें खरीदने का दबाव बनने और कोरोना काल मनचाही फीस वसूलने के लिए दबाव बनाने वाले स्कूलों पर राज्य सरकार ने एक बार फिर से शिकंजा कसना शुरू कर दिया। सभी प्राइवेट स्कूलों के खिलाफ आई शिकायत और कार्रवाई की जानकारी ली जा रही है। शिक्षा निदेशक आरके कुंवर के अनुसार, सभी सीईओ को एक हफ्ते के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।
हाईकोर्ट ने प्राइवेट स्कूलों को रिफ्रेंस बुक लगाने की मंजूरी तो दी थी , मगर यह भी साफ किया कि इनका मूल्य एनसीईआरटी किताबों से ज्यादा न हो।एनसीईआरटी किताबें सस्ती हैं। इसके बावजूद शिकायतें मिल रही है कि स्कूल अपनी मनचाहा फीस वसूल कर रहे है। सरकार के निर्देश हैं कि केवल ट्यूशन फीस ली जा सकती है और अभिभावकों पर फीस के भुगतान के लिए दबाव भी नहीं बनाया जाएगा। मगर, तस्वीर का दूसरा पहलू कुछ और ही है। हरिद्वार के सीईओ डॉ. आनंद भारद्वाज ने कहा कि, महामारी में निजी स्कूलों में फीस वसूलने की 28 शिकायत मिली हैं।
करीब 15 स्कूलों की शिकायतों पर नोटिस और जुर्माने की कार्रवाई की जा चुकी है। पौड़ी में भी कमोबेश यही मामले आए हैं। यह हाल सभी जिलों का है। शिक्षा निदेशक ने अनुसार सीईओ से पहले भी इस बाबत रिपोर्ट मांगी गई थी। अब रिपोर्ट देने के लिए सात दिन का वक्त तय किया गया है।