पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण का मामला एक बार फिर से गरमाने लगा है। पिछले साल सुप्रीम कोर्ट व एनजीटी द्वारा की गई सख्ती को देखते हुए राज्य सरकार इस दिशा में चार माह पहले से फूलप्रूफ एक्शन प्लान बनाने में जुट गई है। हालांकि एक याचिका के सिलसिले में सुप्रीम कोर्ट ने आने वाले 10 अगस्त को मुख्य सचिव को राज्य सरकार का एक्शन प्लान कोर्ट के समक्ष रखने को कहा है।
विभागीय सूत्रों ने बताया कि पूरी कृषि उत्पादन आयुक्त शाखा कोर्ट में सरकार का पक्ष रखने के लिए एक्शन प्लान में जुटी है। पिछले साल इस दिशा में की गई कवायदें और पराली जलाने वालों के विरुद्ध की गई कार्रवाई के सारे आंकड़े एकत्र किए जा रहे हैं ताकि कोर्ट को सारी जानकारी दी जा सके। पिछले साल पहले एनजीटी (राष्ट्रीय हरित अधिकरण) और फिर बाद में सुप्रीम कोर्ट ने अक्तूबर से लेकर दिसम्बर तक पराली जलाने से हो रहे वायु प्रदूषण को लेकर कई बार प्रदेश के अधिकारियों को बुला-बुलाकर फटकार लगाई थी। कोर्ट व एनजीटी की सख्ती के बाद पराली को जलाने से रोकने के लिए पूरे प्रदेश में सख्त अभियान चलाया गया था, जिसमें न सिर्फ किसानों के खिलाफ मुकदमें दर्ज कराए गए थे बल्कि तमाम किसानों पर आर्थिक जुर्माना लगाया गया था।
इसके अलावा पुलिस व प्रशासन के तमाम अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई थी। जानकार बताते हैं सरकार ने इस साल पराली जलाने की घटना को शून्य करने के लिए फूलप्रूफ एक्शन प्लान तैयार कर लिया है और यही एक्शन प्लान वह सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखने भी जा रही है।
पिछले साल पराली जलाने की घटना व उसे रोकने के लिए उठाए गए कदमों की स्थिति