1. हिन्दी समाचार
  2. Breaking News
  3. यूपी में बिजली महंगी करना अब आसान नहीं होगा, अपने बुने जाल में खुद उलझीं कंपनियां

यूपी में बिजली महंगी करना अब आसान नहीं होगा, अपने बुने जाल में खुद उलझीं कंपनियां

By: RNI Hindi Desk 
Updated:
यूपी में बिजली महंगी करना अब आसान नहीं होगा, अपने बुने जाल में खुद उलझीं कंपनियां

बिजली दरें बढ़ाने को लेकर पावर कार्पोरेशन और बिजली कंपनियां अपने ही बुने जाल में उलझ गई हैं। वार्षिक राजस्व आवश्यकता (एआरआर) प्रकाशित होने के बाद बिजली दरें बढ़ा पाना आसान नहीं है। विद्युत नियामक आयोग ने एआरआर पर सुनवाई के लिए समय-सीमा तय कर दी है, ऐसे में अब इस पर सुनवाई होगी न कि बिजली दरें बढ़ाने पर।

उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा ने कहा है कि पावर कार्पोरेशन अपने बुने जाल में फंस गया है। उदाहरण देते हुए कहा कि वर्ष 2017-18 में एआरआर व टैरिफ प्रकाशन के बाद पावर कार्पोरेशन ने रेट चार्ट में मिसलेनियस चार्ज में कुछ बढ़ोतरी का अतरिक्त प्रस्ताव दिया था उसे नियामक आयोग ने संज्ञान में लेने से मना कर दिया था। ऐसे में बिजली कंपनियां जो भी प्रपोजल देंगी वह एक सुझाव होगा।

उन्होंने तर्क देते हुए कहा कि बिजली कंपनियां चाह कर भी उपभोक्ताओं पर बोझ डालने वाला कोई भी प्रपोजल नहीं दे सकती हैं। अब नियामक आयोग को तय करना है कि वह उपभोक्ताओं का बिजली कंपनियों पर निकलने वाला 13337 करोड़ रुपये कैसे दिलता है। रेगुलेटरी लाभ देकर या बिजली दरों में कमी करके। 6 प्रतिशत वितरण हानियों को बढ़ाकर बिजली कंपनियों ने जो गैप बढ़ाकर 4500 करोड़ रुपये दिखाया है वो केवल टैरिफ जारी होने तक दिखेगा। उसके कटौती होकर जीरो होना है। इसलिए बिजली दरें बढ़ा पाना

Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक, यूट्यूब और ट्विटर पर फॉलो करे...