राज्यसभा सांसद और सपा के पूर्व नेता अमर सिंह का सिंगापुर में शनिवार को निधन हो गया। अमर सिंह ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत कांग्रेस के साथ की थी। इसके बाद अमर सिंह मुलायम सिंह के साथ हो गए और दोनों एक दूसरे के बेहद करीब आ गए। अमर सिंह की मर्जी के बगैर सपा में कुछ नहीं होता था। लोकसभा और विधानसभा में टिकट से लेकर मंत्री बनाने तक का फैसला वे करते थे। अमर सिंह समाजवादी पार्टी के महासचिव व राज्य सभा के सदस्य रह चुके हैैं। मुलायम अक्सर राय लिया करते थे लेकिन वक्त बदला तो सपा से दूरी बननी शुरू हुई।
बात फिरोजाबाद उपचुनाव की है कि जब सपा की हार को लेकर यादव परिवार और अमर सिंह में अनबन शुरू हुई। इस चुनाव में मुलायम सिंह ने अपनी बहू डिंपल यादव को टिकट दिया था। हार के बाद अमर सिंह ने कहा था कि सपा को उसका अतिविश्वास ले डूबा।
अमर सिंह ने महासचिव समेत पार्टी के तीन पदों से यह कहते हुए इस्तीफा दे दिया था कि अब वो अपने स्वास्थ्य का ख्याल रखना चाहते हैं। हालांकि उस समय कहा गया कि सिंह पार्टी में अपने घटते हुए कद से नाराज थे। दस दिनों तक इस्तीफे पर चुप रहने वाले मुलायम ने बाद में उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया।
इसके बाद 2014 का लोकसभा चुनाव उन्होंने आरएलडी ज्वाइन कर लिया और फतेहपुर सीकरी संसदीय सीट से मैदान में उतरे लेकिन वो जीत नहीं पाए। इसके बाद मुलायम सिंह से फिर उनकी नजदीकियां बढ़ी। मुलायम सिंह ने रामगोपाल और आजम खां की नाराजगी को नजर अंदाज करते हुए अमर सिंह को 2016 में राज्यसभा भेजा।