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UP News: वाराणसी में बनेगी यूपी की पहली ‘ग्रीन रोड’, 48 करोड़ की लागत से इंटरनेशनल मानकों पर तैयार होंगी 6 सड़कें

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में मुख्यमंत्री ग्रीन रोड इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट स्कीम के तहत 48 करोड़ रुपये की लागत से 6 प्रमुख सड़कों का कायाकल्प किया जा रहा है।

By: Rekha 
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UP News: वाराणसी में बनेगी यूपी की पहली ‘ग्रीन रोड’, 48 करोड़ की लागत से इंटरनेशनल मानकों पर तैयार होंगी 6 सड़कें

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में मुख्यमंत्री ग्रीन रोड इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट स्कीम के तहत 48 करोड़ रुपये की लागत से 6 प्रमुख सड़कों का कायाकल्प किया जा रहा है। इन सड़कों को ग्रीन टेक्नोलॉजी के आधार पर बनाया जाएगा, इन सड़कों को इस तरह से विकसित किया जा रहा है कि इन पर बार-बार खुदाई या अतिक्रमण की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे यह ‘ग्रीन रोड’ कहलाएंगी।

ग्रीन रोड: क्या है खासियत

ग्रीन रोड्स को पूरी तरह इको-फ्रेंडली बनाया जाएगा, जिसमें वेस्ट प्लास्टिक जैसे सामग्री का उपयोग किया जाएगा। सड़क निर्माण में अंडरग्राउंड केबल, बिजली के तार, पानी की पाइप, भूमिगत नाली, फुटपाथ और स्ट्रीट लाइट जैसी सुविधाएं भी शामिल होंगी। इन सड़कों के किनारे वृक्षारोपण किया जाएगा, जिससे शहर के प्रदूषण में कमी आएगी।

योजना की विशेषताएं

नगर निगम के अनुसार, ‘सीएम ग्रीन रोड इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट स्कीम’ के तहत ये सड़कों को बेहतर तकनीक पर बनाया जा रहा है, जैसा लखनऊ के विधानसभा मार्ग के पास की सड़कों में भी देखने को मिला था।
काशी की व्यस्ततम सड़कें होंगी शामिल:

ये सड़कें वाराणसी के व्यस्ततम रूट्स में से हैं, जिनसे प्रतिदिन 10,000 से 15,000 गाड़ियाँ गुजरती हैं। ऐसे में ये सड़कें काशी के एक हिस्से को दूसरे हिस्से से जोड़ने का प्रमुख साधन हैं और इनके कायाकल्प से ट्रैफिक का प्रवाह भी बेहतर होगा।

ग्रीन रोड तकनीक और फायदे

ग्रीन रोड्स को इको-फ्रेंडली बनाने के लिए वेस्ट प्लास्टिक का 7% उपयोग किया जाएगा, जो पर्यावरण संरक्षण में मदद करेगा। इस तकनीक से सड़कों का जीवनकाल भी बढ़ेगा और स्थानीय लोग बेहतर ड्राइविंग अनुभव का लाभ उठा सकेंगे।

नगर निगम के अधिकारियों का बयान

नगर निगम के चीफ इंजीनियर मोईनुद्दीन ने कहा कि इस योजना के अंतर्गत बनने वाली सड़कों का निर्माण कार्य 18 महीने में पूरा कर लिया जाएगा। इन सड़कों के किनारे वृक्षारोपण भी किया जाएगा ताकि प्रदूषण स्तर कम हो और वातावरण में हरियाली बढ़े। इसके अतिरिक्त, सड़कों को बार-बार कटने से रोकने के लिए सभी अंडरग्राउंड सुविधाएं पहले ही पूरी कर ली जाएंगी।

काशीवासियों में उत्साह

इन बदलावों से स्थानीय लोग उत्साहित हैं और मानते हैं कि यह परियोजना काशी की बदलती छवि का हिस्सा है। बनारस का यह नया स्वरूप आने वाले समय में न केवल स्थानीय लोगों बल्कि पर्यटकों को भी आकर्षित करेगा।

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