{ श्री अचल सागर जी महाराज की कलम से }
एक ऐसा व्यक्ति जो अपने समय में विद्या और ज्ञान अर्जित नहीं कर पाया उसे जीवन भर पछताने के अलावा कुछ नहीं मिलता है। ज्ञान एक ऐसी चीज़ जो हर समय और हर देश में मनुष्य का साथ देती है।
अगर कोई नवयुवक है तो उसे यह सोचना समझना चाहिए की मैंने अब तक कितनी शिक्षा ग्रहण की है और कितना ज्ञान अर्जित किया है। शिक्षा और ज्ञान दो अलग अलग चीज़े है।
ऋषि मुनियों ने भी कहा है कि जिसे साहित्य, संगीत, कला की समझ नहीं है वो बस मनुष्य रुप में जानवर है। फर्क सिर्फ इतना है कि उसकी पूंछ नहीं है।

देखा जाए तो यही जीवन की सच्चाई है। इसलिए बाल अवस्था से लेकर किशोर अवस्था तक बच्चे को जितना हो सके उतना ज्ञान देना चाहिए।
अगर ज्ञान होगा तो ही आगे जाकर जीवन में कुछ बन पाएगा लेकिन ज्ञान के अभाव में ना ही वो सफल हो पाएगा और ना ही समाज में अपनी इज्जत बना पाएगा।
एक समय था जब मां बाप के कहने से काम हो जाते थे लेकिन अब ऐसा नहीं है। अब खुद के दम पर मनुष्य को सफल होना होता है इसलिए ज्ञान जरुरी है।
एक ऐसा इंसान जिसके पास डिग्री भी है और ज्ञान भी है तो वो समाज में सम्मान पाता है और अपने जीवन के सभी कार्य अपने बल पर करता है।