यूक्रेन युद्ध के बीच रूस की घेरेबंदी में जुटे नाटो देशों को बड़ी सफलता हाथ लगी है। तुर्की ने फिनलैंड और स्वीडन को नाटो में शामिल किए जाने का विरोध छोड़ दिया है। इससे अब रूस के इन दोनों ही पड़ोसी देशों के नाटो में शामिल होने का रास्ता साफ हो गया है।

स्वीडन और फिनलैंड को नाटो में शामिल होने का विरोध कर रहा तुर्की अब मान गया है। तीनों देशों के टॉप नेताओं से बातचीत के बाद नाटो गठबंधन के सेक्रेटरी जनरल जेन्स स्टोल्टेनबर्ग ने कहा है कि अब तीनों देशों के बीच एक समझौता हो गया है जो कि फिनलैंड और स्वीडन को नाटो में शामिल होने का मार्ग प्रशस्त करता है।

उन्होंने इसे ऐतिहासिक फैसला करार दिया है। वे एक-दूसरे की सुरक्षा की रक्षा करेंगे। इसके साथ तुर्की की ओर से पिछले कई सप्ताह से चला आ रहा ड्रामा अब खत्म हो गया है। यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के बाद स्वीडन और फिनलैंड जैसे देश गुटनिरपेक्ष स्थिति को छोड़कर नाटो से जुड़ने के लिए मजबूर हुए हैं। बता दें कि फिनलैंड रूस के साथ एक लंबी सीमा साझा करता है। नाटो संधि के तहत किसी भी सदस्य देश पर हमले को सभी सदस्य देशों के खिलाफ हमला माना जाएगा और पूरे गठबंधन द्वारा हमले का जवाब दिया जाएगा। नाटो सर्वसम्मति से संचालित होता है।

चूंकि तुर्की फिनलैंड और स्वीडन के नाटो में शामिल होने को लेकर विरोध में था। ऐसे में तुर्की की सहमति के बिना ये दोनों देश नाटो सदस्य नहीं बन सकते थे। तुर्की ने कहा था कि फिनलैंड और स्वीडन जैसे देश कुर्द विद्रोही समूहों को लेकर अपना रुख बदलते हैं जिन्हें तुर्की आतंकी मानता है। हफ्ते भर से अधिक से बातचीत के बाद तीनों देश एक संयुक्त समझौते पर पहुंचे हैं। तुर्की ने कहा है कि हम विद्रोही समूहों के खिलाफ लड़ाई में पूर्ण सहयोग चाहते थे, जो हमें मिला है।

तुर्की ने कहा है कि दोनों देश कुर्दिस्तान विद्रोह संबंधित समूहों पर ठोस कदम उठाने पर सहमत हुए हैं। दोनों देशों ने आतंकी प्रत्यर्पण पर भी ठोस कदम उठाएंगे। तुर्की ने लगातार कहा है कि हम चाहते हैं कि फिनलैंड और स्वीडन वांछित व्यक्तियों को प्रत्यर्पित करें और उत्तर-पूर्वी सीरिया में तुर्की की 2019 की सैन्य घुसपैठ के बाद लगाए गए हथियारों पर प्रतिबंध हटा। स्वीडन और फिनलैंड की सदस्यता पर तुर्की ने सबसे पहले 13 मई को आपत्ति उठाई थी।

दअरसल एर्दोआन ने कुर्द चरमपंथियों के खिलाफ दोनों देशों के एक्शन ना लेने को अपनी असहमति का कारण बताया था। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों देश कुर्द चरमपंथियों को तुर्की के हवाले करने से इनकार कर रहे थे। एर्दोआन ने कहा था , स्वीडन और फिनलैंड दोनों की ही आतंकवादी संगठनों पर कोई पारदर्शी और स्पष्ट नीति नहीं है।

उन्होंने यह आरोप भी लगाया था अगर दोनों देश नाटो में शामिल हुए, तो यह संगठन आतंकवादियों को पनाह देने का अड्डा बन जाएगा। दरसल स्वीडन ने हालिया दशकों में मिडिल-ईस्ट से आए हजारों शरणार्थियों को अपने यहां जगह दी है। इनमें सीरिया, इराक और तुर्की से गए कुर्द भी शामिल हैं।