केंद्रीय बैंक ने पर्याप्त पूंजी नहीं होने और बैंक की आमदनी से जुड़ी संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए यह फैसला किया है। रिजर्व बैंक की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि करीब 99 फीसद डिपोजिटर्स को डिपोजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (DICGC) की ओर से पूरी जमा राशि वापस मिलेगी। सहकारी बैंक के लाइसेंस को रद्द किए जाने और लिक्विडेशन की कार्यवाही शुरू किए जाने के साथ कराड जनता सहकारी बैंक के जमाकर्ताओं को पैसे लौटाने के काम को अमल में लाया जाएगा।
लिक्विडेशन के बाद हर जमाकर्ता मौजूदा नियमों एवं शर्तों के हिसाब से डिपोजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन से पांच लाख रुपये तक की जमा राशि को वापस पाने का हकदार होगा।
Karad Janata Sahakari Bank के लाइसेंस को रद्द किए जाने का यह फैसला सात दिसंबर के कामकाजी घंटों के बाद से प्रभावी हो गया है। इसके प्रभावी होने के साथ बैंक अब बैंकिंग से जुड़ी कोई गतिविधि नहीं कर सकता है। इसके तहत बैंक ना किसी से जमा स्वीकार कर सकता है और ना ही किसी को पैसे का भुगतान कर सकता है।
आरबीआई ने कहा है कि बैंक सात नवंबर, 2017 से ‘ऑल इन्क्लुसिव डायरेक्शन्स’ के अंतर्गत था। को-ऑपरेशन एंड रजिस्ट्रार ऑफ को-ऑपरेटिव सोसायटीज, महाराष्ट्र के कमिश्नर को भी बैंक को बंद करने का ऑर्डर जारी करने का आग्रह किया गया है। साथ ही उनसे बैंक के लिए एक लिक्विडेटर नियुक्त करने को कहा गया है।
RBI ने यह कहते हुए सहकारी बैंक का लाइसेंस कैंसल किया है कि बैंक के पास पर्याप्त पूंजी उपलब्ध नहीं है। इस तरह यह बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट, 1949 के संबंधित प्रावधानों का अनुपालन नहीं करता है।
केंद्रीय बैंक ने कहा है कि यह बैंक अपने सभी जमाकर्ताओं को पूरी राशि लौटाने की स्थिति में नहीं रह गया था। उसने साथ ही कहा है कि अगर बैंक को आगे बैंकिंग बिजनेस जारी रखने की अनुमति दी जाती तो इससे आम लोगों के हितों को नुकसान होता।