सरकार और फोन निर्माता कंपनियां मिलकर मोबाइल फोन निर्माण में चीन पछाड़ने और भारत को शीर्ष स्थान दिलाने में जुट गई हैं। सोमवार को इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने कहा कि अब मोबाइल फोन निर्माण में चीन को पीछे छोड़ना भारत का लक्ष्य है। मोबाइल फोन निर्माण में देश को नंबर-वन बनाने के लिए अगस्त से सरकार ने प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआइ) स्कीम शुरू की है।
प्रसाद ने कहा कि मोबाइल फोन निर्माण में पीएलआइ स्कीम की सफलता को देखते हुए इसे अन्य आवश्यक इलेक्ट्रॉनिक्स वस्तुओं के निर्माण से जोड़ा जा सकता है। इनमें लैपटॉप व टैबलेट जैसी इलेक्ट्रॉनिक्स वस्तुएं हो सकती हैं।
इंडियन सेल्यूलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन (आइसीइए) के मुताबिक अगले वर्ष मार्च तक भारत का लैपटॉप आयात पांच अरब डॉलर यानी करीब 38,750 करोड़ रुपये मूल्य तक पहुंच जाएगा। इनमें अकेले चीन की हिस्सेदारी 4.37 अरब डॉलर यानी लगभग 32,775 करोड़ रुपये मूल्य की होगी। लैपटॉप जैसी इलेक्ट्रॉनिक्स वस्तुओं के निर्माण को पीएलआइ स्कीम से जोड़ने पर चीन से आयात में कमी के साथ भारत मोबाइल फोन की तरह लैपटॉप का प्रमुख निर्यातक देश बन सकता है।
इलेक्ट्रॉनिक्स व आईटी मंत्रालय ने नेशनल पॉलिसी ऑन इलेक्ट्रॉनिक्स 2019 के तहत वर्ष 2025 तक देश में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्यूफैक्चरिंग टर्नओवर को 26 लाख करोड़ रुपये पर पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। इनमें से मोबाइल फोन निर्माण की हिस्सेदारी 13 लाख करोड़ रुपये होगी। सोमवार को उद्योग संगठन फिक्की के एक कार्यक्रम में प्रसाद ने कहा कि उनका लक्ष्य भारत को दुनिया का प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्यूफैक्चरिंग हब बनाना है।
पीएलआइ स्कीम मुख्य रूप से निर्यात से जुड़ी स्कीम है। इसका मकसद यह है कि दुनिया की कंपनियां भारत में आएं, मैन्यूफैक्चरिंग करें और यहां से निर्यात करें। दुनियाभर के मोबाइल फोन निर्माण में भारत की हिस्सेदारी 11 फीसद और चीन की लगभग 25 फीसद है।
एपल, विस्ट्रॉन और पेगाट्रॉन के बाद अब सैमसंग भारत में मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट के लिए निवेश करेगी। सैमसंग चीन में निर्माण करने वाली अपनी यूनिट को भारत शिफ्ट कर रही है। इसके तहत सैमसंग भारत में 4,825 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। कंपनी उत्तर प्रदेश के नोएडा में यह यूनिट लगाएगी। यह सैमसंग की वैसी उच्च तकनीकों से लैस यूनिट होगी, जैसी इस वक्त दुनियाभर में सिर्फ दो हैं। स्कीम फॉर प्रमोशन ऑफ मैन्यूफैक्चरिंग इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट एंड सेमीकंडक्टर तहत सैमसंग यह निवेश कर रही है। इससे सैमसंग को 460 करोड़ रुपये की मदद मिलेगी।