स्थिति और भी गंभीर इसलिए है क्योंकि घाट पर न तो कोई चेतावनी बोर्ड लगा है और न ही आपात स्थिति से निपटने के लिए गोताखोर या बचाव दल तैनात है। स्थानीय यात्रियों का कहना है कि इस तरह ओवरलोडेड नावों में सफर करना जान जोखिम में डालने जैसा है।
स्थिति और भी गंभीर इसलिए है क्योंकि घाट पर न तो कोई चेतावनी बोर्ड लगा है और न ही आपात स्थिति से निपटने के लिए गोताखोर या बचाव दल तैनात है। स्थानीय यात्रियों का कहना है कि इस तरह ओवरलोडेड नावों में सफर करना जान जोखिम में डालने जैसा है।
सीवरेज कंपनी की लापरवाही से सड़क पर बने गड्ढे में ट्रेक्टर ट्रॉली के टायर फंस गए, आगे बढ़ाने के लिए जेसीबी का धक्का लगते ही ट्रैक्टर ट्रॉली पलट गई, दो-तीन घंटे तक आवागमन हुआ प्रभावित।