यात्रा शुरू होने से पहले ही कई श्रद्धालु पहले पड़ाव पिंग्लेश्वर तक पहुंच चुके हैं। लगभग 118 किलोमीटर की यह पैदल यात्रा पांच दिनों में पूरी होती है।
यात्रा शुरू होने से पहले ही कई श्रद्धालु पहले पड़ाव पिंग्लेश्वर तक पहुंच चुके हैं। लगभग 118 किलोमीटर की यह पैदल यात्रा पांच दिनों में पूरी होती है।
मान्यता है कि नवरात्रि की नवमी तिथि पर कुछ क्षणों के लिए माता की गर्दन सीधी होती है, जिसे देखना बेहद दुर्लभ माना जाता है।