खाद्यान उत्पादन में भी देश दोगुना निर्यात कर रहा है। कांग्रेस के जमाने में खाने के लिए गेंहूं तक आयात करना पड़ता था। 60-70 के दशक में जब खाने की तकलीफ थी तो कांग्रेस के नेताओं ने उपवास करने के मार्ग पर जाने बात की। आज अकेला रायसेन 47 देशों में बासमती चावल का निर्यात कर रहा है।
