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वैशाखी पर्व धूमधाम से मनाया गया, शब्द कीर्तन पढ़े, अरदास के बाद गुरू का अटूट लंगर

गौरतलब है की अप्रैल में रवि की फसल पककर पूरी तरह से तैयार हो जाती है और उसकी कटाई भी शुरू होती है। इसलिए बैसाखी को फसल पकने और सिख धर्म की स्थापना के रूप में मनाया जाता है।

By: Naredra 
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वैशाखी पर्व धूमधाम से मनाया गया, शब्द कीर्तन पढ़े, अरदास के बाद गुरू का अटूट लंगर

धारः स्थानीय धामनोद गुरुद्वारे में सिख एवं सिंधी समाजजन ने बैसाखी पर्व को धूमधाम से मनाया। नित नेम का पाठ हुआ। उसके बाद निशान साहिब का चोला सरबजीत सिंह, हरपाल सिंह, यश सलूजा और जीतेद्र वाधवानी ने बदला। बोले सो निहाल का सत श्री अकाल का उदघोष हुआ। बाद में संगत ने सुखमनी साहिब का पाठ किया।

पाठ के बाद संगत ने शब्द कीर्तन किया। ज्ञानी दलजीत सिंह ने अरदास की। कड़ा प्रसाद वितरित कर जलेबी खिलाकर मुह मीठा करवाया गया। बाद में गुरु का अटूट लंगर हुआ। कई श्रद्धालुओं ने और सभी वर्गो के लोगों ने एक पंक्ति में बैठकर लंगर ग्रहण किया। एक दूसरे को बैसाखी की बधाई दी।

इस मौके पर श्रद्धालुओ में काफी उत्साह देखने को मिला। गौरतलब है की अप्रैल में रवि की फसल पककर पूरी तरह से तैयार हो जाती है और उसकी कटाई भी शुरू होती है। इसलिए बैसाखी को फसल पकने और सिख धर्म की स्थापना के रूप में मनाया जाता है।

ऐसा कहा जाता है कि इसी दिन सिख पंथ के दसवें गुरु श्री गुरु गोविंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना की थी तभी से बैसाखी का त्यौहार मनाया जाता है।

धार से संवाददाता सौभाग प्रजापति की रिपोर्ट

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