त्योहारों के दौरान ट्रेन यात्रियों की परेशानियाँ बढ़ गई हैं। कई यात्रियों ने शिकायत की है कि ट्रेनों के स्लीपर कोचों में जनरल टिकट वाले यात्री कब्ज़ा जमाए बैठे हैं, जिससे आरक्षित टिकटधारियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति इतनी गंभीर है कि सीट खाली करने को कहने पर कई बार झगड़े की नौबत आ जाती है।
जोधपुर से वाराणसी के बीच चलने वाली मरुधर एक्सप्रेस में यात्रि ने बताया कि उनके साथ उनकी पत्नी और तीन बच्चे हैं, पर उनकी कन्फर्म सीट पर जनरल टिकट वाले बैठे हैं। शिकायत करने के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हुआ। इसी तरह अंडमान एक्सप्रेस में सफर कर रहे एक अन्य यात्री ने बताया कि ट्रेन में कई लोग बिना टिकट या जनरल टिकट लेकर स्लीपर कोच में घुस आए हैं। गैलरी तक भरी हुई है, जिससे निकलना तक मुश्किल हो गया है।
यात्रियों का कहना है कि आरक्षण कराने का मकसद आरामदायक यात्रा करना होता है, लेकिन जनरल टिकटधारकों के कब्ज़े से स्थिति असहनीय हो गई है। जीआरपी और आरपीएफ को शिकायत करने के बावजूद इन पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही। रेलवे हेल्पलाइन पर ऐसी दर्जनों शिकायतें रोजाना दर्ज हो रही हैं, लेकिन अधिकांश मामलों में केवल औपचारिक निस्तारण किया जाता है।
रेलवे सलाहकार समिति के पूर्व सदस्य पंकज अग्रवाल ने कहा कि रेलवे यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा पर ध्यान दे रही है, लेकिन इस दिशा में और सख़्ती की जरूरत है। यात्रियों को बड़ी मुश्किल से कन्फर्म टिकट मिलती है, ऐसे में अनधिकृत यात्रियों द्वारा सीट पर कब्ज़ा करना गंभीर समस्या है। उन्होंने कहा कि रेलवे को ऐसे मामलों में सख़्त कार्रवाई कर यात्रियों के भरोसे को बनाए रखना चाहिए ताकि आरक्षित टिकटधारी यात्रियों को सुरक्षित और आरामदायक यात्रा का अधिकार मिल सके।