भोपालः मध्यप्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भाजपा सरकार पर हमला बोलते कहा कि “नारी शक्ति वंदन अभियान” के नाम पर लोकसभा और विधानसभाओं में 33% आरक्षण की बात तो की जा रही है, लेकिन इसके प्रावधान और क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े हैं। इस व्यवस्था में SC/ST महिलाओं के लिए आरक्षण का प्रावधान है, किंतु OBC महिलाओं के लिए कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं दिखाई देती। उन्होंने कहा कि क्या देश और प्रदेश की इतनी बड़ी आबादी की महिलाओं को इस व्यवस्था से बाहर रखना ही सामाजिक न्याय है?
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि इस आरक्षण को परिसीमन से जोड़ दिया गया है, जबकि इस प्रक्रिया की कोई स्पष्ट समय-सीमा निर्धारित नहीं की गई है। ऐसे में यह प्रश्न स्वाभाविक है कि क्या यह आरक्षण मध्यप्रदेश के 2028 विधानसभा चुनाव में लागू हो पाएगा? या फिर यह केवल एक राजनैतिक घोषणा बनकर रह जाएगा? श्री सिंघार ने कहा कि यह भी बड़ा सवाल है कि सरकार 2027 की जातिगत जनगणना के परिणाम का इंतजार क्यों नहीं करना चाहती? क्या बिना वास्तविक सामाजिक आंकड़ों के इतना बड़ा निर्णय लेना न्यायसंगत है, या फिर OBC वर्ग की वास्तविक हिस्सेदारी सामने आने से बचने की कोशिश है? उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव को इस पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए कि प्रदेश की महिलाओं को वास्तविक और समावेशी प्रतिनिधित्व कब और कैसे मिलेगा?
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि यह भी याद रखना चाहिए कि स्थानीय निकायों में महिला आरक्षण कोई नई पहल नहीं है, बल्कि इसकी मजबूत नींव 1992-93 में 73वें और 74वें संविधान संशोधनों के माध्यम से रखी गई थी। आज देश में 14 लाख से अधिक महिलाएं पंचायत और नगर निकायों में निर्वाचित हैं और स्थानीय स्तर पर लगभग 40 प्रतिशत प्रतिनिधित्व महिलाओं का है। यह स्वर्गीय राजीव गांधी की दूरदर्शी सोच का परिणाम है, जिसने महिला सशक्तिकरण को नीचे से ऊपर तक मजबूत किया।
नेता प्रतिपक्ष ने अंत मे कहा कि महिलाओं के नाम पर केवल अभियान या घोषणाएं नहीं, बल्कि समावेशी, स्पष्ट और समयबद्ध व्यवस्था ही वास्तविक सशक्तिकरण सुनिश्चित कर सकती है।